संवाददाता - रोहिणी राजपूत
नई दिल्ली: अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को छह साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। इसकी वजह सीधे तौर पर सुशांत केस में कोई नई FIR नहीं, बल्कि उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में 2026 में हुई नई कानूनी कार्रवाई है। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिशा सालियान की मौत के मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दूसरी ओर, सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में CBI ने 2025 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। रिपोर्ट में जांच एजेंसी ने मौत को आत्महत्या माना और मामले में दर्ज आरोपों में किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका नहीं पाई। हालांकि, इस क्लोजर रिपोर्ट पर सक्षम अदालत की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
ऐसे में सवाल उठता है कि 2026 में ऐसा क्या हुआ जिससे सुशांत सिंह राजपूत का मामला फिर सुर्खियों में आ गया?
क्या हुआ है 2026 में?
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान की याचिका से हुई। उन्होंने अपनी बेटी की मौत की जांच को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था।
2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा सालियान की मौत के मामले की जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया। कोर्ट ने मुंबई पुलिस की लंबे समय तक चली जांच और FIR दर्ज न किए जाने को लेकर सवाल उठाए और CBI को मामले की व्यापक जांच करने का निर्देश दिया।
कोर्ट के आदेश के अनुसार, CBI को दिशा सालियान के पिता का बयान दर्ज करने और FIR दर्ज करने को कहा गया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि जांच के दौरान पर्याप्त सामग्री मिलने तक किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाएगा।
इसके बाद 14 सितंबर 2026 को CBI ने दिशा सालियान की मौत के मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
दिशा सालियान कौन थीं और सुशांत से क्या संबंध था?
दिशा सालियान एक सेलिब्रिटी मैनेजर थीं और उन्होंने कुछ समय के लिए सुशांत सिंह राजपूत के साथ भी काम किया था।
8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई थी। उस समय मुंबई पुलिस ने Accidental Death Report यानी ADR दर्ज की थी। इसके छह दिन बाद, 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत मुंबई के बांद्रा स्थित अपने घर में मृत पाए गए। दोनों घटनाओं के बीच कुछ दिनों का अंतर होने के कारण बाद में दोनों मामलों को लेकर कई तरह की अटकलें सामने आईं।
हालांकि, दोनों मामलों को जोड़ने वाली कई बातें सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा रही हैं, लेकिन किसी भी कथित कनेक्शन को तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं है। अब दिशा सालियान मामले में CBI की नई जांच का उद्देश्य उनकी मौत की परिस्थितियों की अलग से जांच करना है।
सुशांत सिंह राजपूत केस में CBI ने क्या कहा था?
सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद मामले की जांच को लेकर काफी विवाद हुआ था। बाद में CBI ने मामले की जांच अपने हाथ में ली।
मार्च 2025 में CBI ने अपनी जांच पूरी करने के बाद मामले से संबंधित क्लोजर रिपोर्ट अदालत में दाखिल की। रिपोर्ट में एजेंसी ने कहा कि उसे सुशांत की मौत में किसी तरह का आपराधिक षड्यंत्र या अन्य लोगों की भूमिका का प्रमाण नहीं मिला।
रिपोर्ट के मुताबिक, CBI ने सुशांत की मौत को आत्महत्या माना और FIR में नामजद लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला साबित नहीं पाया। इसमें रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार सहित अन्य लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को भी जांच में समर्थन नहीं मिला।
हालांकि, CBI की क्लोजर रिपोर्ट अपने आप में अदालत का अंतिम फैसला नहीं है। इस रिपोर्ट पर संबंधित अदालत की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
फिर पोस्टमॉर्टम स्टाफ का दावा क्यों चर्चा में है?
सितंबर 2026 में सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़ी पुरानी पोस्टमॉर्टम संबंधी बातों को लेकर भी खबरें सामने आईं।
कूपर अस्पताल के पूर्व मॉर्चरी स्टाफ सदस्य रूपकुमार शाह ने एक स्टिंग ऑपरेशन में सुशांत के शरीर पर चोट के निशान और गला दबाए जाने जैसे गंभीर दावे किए। उन्होंने पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए।
लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। ये रूपकुमार शाह के दावे हैं, आधिकारिक मेडिकल निष्कर्ष नहीं। उपलब्ध रिपोर्टों में इन दावों के स्वतंत्र प्रमाण की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इन्हें सुशांत की मौत का स्थापित कारण मानना सही नहीं होगा।
क्या दिशा सालियान केस की नई जांच से सुशांत केस भी खुलेगा?
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा सालियान की मौत के मामले की जांच CBI को सौंपी है। कोर्ट ने CBI को मामले की परिस्थितियों की जांच करने और जांच के आधार पर आगे की रिपोर्ट अदालत में दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगर जांच में अपराध बनता है तो उचित रिपोर्ट दाखिल की जाएगी और अगर अपराध नहीं बनता तो CBI summary report दाखिल कर सकती है।
इसका मतलब यह है कि दिशा सालियान केस की नई CBI जांच चल रही है, लेकिन इससे अपने आप सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में नई जांच शुरू होने की घोषणा नहीं हुई है।
दोनों मामलों से जुड़े किसी भी नए तथ्य का महत्व जांच के दौरान सामने आने वाले सबूतों पर निर्भर करेगा।
2020 से अब तक क्या-क्या हुआ?
पूरे मामले को समझने के लिए घटनाक्रम पर नजर डालना जरूरी है।
8 जून 2020: दिशा सालियान की मुंबई में मौत हुई और पुलिस ने ADR दर्ज की।
14 जून 2020: सुशांत सिंह राजपूत बांद्रा स्थित अपने घर में मृत पाए गए। इसके बाद उनकी मौत को लेकर देशभर में चर्चा शुरू हुई।
इसके बाद सुशांत मामले की जांच CBI तक पहुंची। करीब पांच साल की जांच के बाद मार्च 2025 में CBI ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की।
फिर 2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा सालियान मामले में CBI जांच का आदेश दिया।
और 14 सितंबर 2026 को CBI ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
यही नई कार्रवाई है जिसकी वजह से सुशांत सिंह राजपूत से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में आया है।
क्या किसी को आरोपी बनाया गया है?
इस मामले में यह बात विशेष रूप से समझना जरूरी है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि जांच के दौरान किसी व्यक्ति को तब तक आरोपी नहीं माना जाएगा जब तक जांच अधिकारी के पास उसके खिलाफ पर्याप्त सामग्री न हो।
इसलिए किसी व्यक्ति का नाम FIR या जांच से संबंधित रिपोर्ट में आना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। CBI को जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई करनी होगी।
अब आगे क्या होगा?
अब CBI दिशा सालियान की मौत से जुड़े उपलब्ध दस्तावेजों, सबूतों और बयानों की जांच करेगी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस को मामले से संबंधित दस्तावेज और सामग्री CBI को सौंपने का निर्देश दिया है।
CBI जांच के बाद यह तय होगा कि मामले में कोई अपराध बनता है या नहीं। अगर जांच में अपराध के पर्याप्त सबूत मिलते हैं तो संबंधित अदालत के सामने उचित रिपोर्ट दाखिल की जाएगी। अगर ऐसा कोई अपराध सामने नहीं आता है तो CBI summary report दाखिल कर सकती है।
निष्कर्ष
सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला छह साल बाद भी लोगों की दिलचस्पी का विषय बना हुआ है। 2025 में CBI ने सुशांत केस में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर आत्महत्या के निष्कर्ष के साथ आपराधिक साजिश की संभावना को खारिज किया था। वहीं 2026 में दिशा सालियान की मौत के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI ने नई FIR दर्ज कर जांच शुरू की है।
फिलहाल दिशा सालियान मामले की जांच शुरुआती चरण में है। इसलिए सामने आ रहे दावों और आरोपों को अंतिम सच मानने के बजाय CBI की जांच और अदालत की आगे की कार्रवाई का इंतजार करना जरूरी है।
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