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Friday, September 18, 2026

सुशांत सिंह राजपूत केस फिर चर्चा में, दिशा सालियान मामले में CBI ने दर्ज की FIR; जानिए अब तक क्या हुआ


संवाददाता - रोहिणी राजपूत



नई दिल्ली: अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को छह साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। इसकी वजह सीधे तौर पर सुशांत केस में कोई नई FIR नहीं, बल्कि उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में 2026 में हुई नई कानूनी कार्रवाई है। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिशा सालियान की मौत के मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

दूसरी ओर, सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में CBI ने 2025 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। रिपोर्ट में जांच एजेंसी ने मौत को आत्महत्या माना और मामले में दर्ज आरोपों में किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका नहीं पाई। हालांकि, इस क्लोजर रिपोर्ट पर सक्षम अदालत की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।

ऐसे में सवाल उठता है कि 2026 में ऐसा क्या हुआ जिससे सुशांत सिंह राजपूत का मामला फिर सुर्खियों में आ गया?

क्या हुआ है 2026 में?

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान की याचिका से हुई। उन्होंने अपनी बेटी की मौत की जांच को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था।

2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा सालियान की मौत के मामले की जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया। कोर्ट ने मुंबई पुलिस की लंबे समय तक चली जांच और FIR दर्ज न किए जाने को लेकर सवाल उठाए और CBI को मामले की व्यापक जांच करने का निर्देश दिया। 

कोर्ट के आदेश के अनुसार, CBI को दिशा सालियान के पिता का बयान दर्ज करने और FIR दर्ज करने को कहा गया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि जांच के दौरान पर्याप्त सामग्री मिलने तक किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाएगा। 

इसके बाद 14 सितंबर 2026 को CBI ने दिशा सालियान की मौत के मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी। 

दिशा सालियान कौन थीं और सुशांत से क्या संबंध था?

दिशा सालियान एक सेलिब्रिटी मैनेजर थीं और उन्होंने कुछ समय के लिए सुशांत सिंह राजपूत के साथ भी काम किया था।

8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई थी। उस समय मुंबई पुलिस ने Accidental Death Report यानी ADR दर्ज की थी। इसके छह दिन बाद, 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत मुंबई के बांद्रा स्थित अपने घर में मृत पाए गए। दोनों घटनाओं के बीच कुछ दिनों का अंतर होने के कारण बाद में दोनों मामलों को लेकर कई तरह की अटकलें सामने आईं। 

हालांकि, दोनों मामलों को जोड़ने वाली कई बातें सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा रही हैं, लेकिन किसी भी कथित कनेक्शन को तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं है। अब दिशा सालियान मामले में CBI की नई जांच का उद्देश्य उनकी मौत की परिस्थितियों की अलग से जांच करना है।










सुशांत सिंह राजपूत केस में CBI ने क्या कहा था?

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद मामले की जांच को लेकर काफी विवाद हुआ था। बाद में CBI ने मामले की जांच अपने हाथ में ली।

मार्च 2025 में CBI ने अपनी जांच पूरी करने के बाद मामले से संबंधित क्लोजर रिपोर्ट अदालत में दाखिल की। रिपोर्ट में एजेंसी ने कहा कि उसे सुशांत की मौत में किसी तरह का आपराधिक षड्यंत्र या अन्य लोगों की भूमिका का प्रमाण नहीं मिला। 

रिपोर्ट के मुताबिक, CBI ने सुशांत की मौत को आत्महत्या माना और FIR में नामजद लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला साबित नहीं पाया। इसमें रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार सहित अन्य लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को भी जांच में समर्थन नहीं मिला। 

हालांकि, CBI की क्लोजर रिपोर्ट अपने आप में अदालत का अंतिम फैसला नहीं है। इस रिपोर्ट पर संबंधित अदालत की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। 

फिर पोस्टमॉर्टम स्टाफ का दावा क्यों चर्चा में है?

सितंबर 2026 में सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़ी पुरानी पोस्टमॉर्टम संबंधी बातों को लेकर भी खबरें सामने आईं।

कूपर अस्पताल के पूर्व मॉर्चरी स्टाफ सदस्य रूपकुमार शाह ने एक स्टिंग ऑपरेशन में सुशांत के शरीर पर चोट के निशान और गला दबाए जाने जैसे गंभीर दावे किए। उन्होंने पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। 

लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। ये रूपकुमार शाह के दावे हैं, आधिकारिक मेडिकल निष्कर्ष नहीं। उपलब्ध रिपोर्टों में इन दावों के स्वतंत्र प्रमाण की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इन्हें सुशांत की मौत का स्थापित कारण मानना सही नहीं होगा।

क्या दिशा सालियान केस की नई जांच से सुशांत केस भी खुलेगा?

फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा सालियान की मौत के मामले की जांच CBI को सौंपी है। कोर्ट ने CBI को मामले की परिस्थितियों की जांच करने और जांच के आधार पर आगे की रिपोर्ट अदालत में दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगर जांच में अपराध बनता है तो उचित रिपोर्ट दाखिल की जाएगी और अगर अपराध नहीं बनता तो CBI summary report दाखिल कर सकती है। 

इसका मतलब यह है कि दिशा सालियान केस की नई CBI जांच चल रही है, लेकिन इससे अपने आप सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में नई जांच शुरू होने की घोषणा नहीं हुई है।

दोनों मामलों से जुड़े किसी भी नए तथ्य का महत्व जांच के दौरान सामने आने वाले सबूतों पर निर्भर करेगा।










2020 से अब तक क्या-क्या हुआ?

पूरे मामले को समझने के लिए घटनाक्रम पर नजर डालना जरूरी है।

8 जून 2020: दिशा सालियान की मुंबई में मौत हुई और पुलिस ने ADR दर्ज की। 

14 जून 2020: सुशांत सिंह राजपूत बांद्रा स्थित अपने घर में मृत पाए गए। इसके बाद उनकी मौत को लेकर देशभर में चर्चा शुरू हुई।

इसके बाद सुशांत मामले की जांच CBI तक पहुंची। करीब पांच साल की जांच के बाद मार्च 2025 में CBI ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। 

फिर 2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा सालियान मामले में CBI जांच का आदेश दिया। 

और 14 सितंबर 2026 को CBI ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी। 

यही नई कार्रवाई है जिसकी वजह से सुशांत सिंह राजपूत से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में आया है।

क्या किसी को आरोपी बनाया गया है?

इस मामले में यह बात विशेष रूप से समझना जरूरी है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि जांच के दौरान किसी व्यक्ति को तब तक आरोपी नहीं माना जाएगा जब तक जांच अधिकारी के पास उसके खिलाफ पर्याप्त सामग्री न हो। 

इसलिए किसी व्यक्ति का नाम FIR या जांच से संबंधित रिपोर्ट में आना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। CBI को जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई करनी होगी।

अब आगे क्या होगा?

अब CBI दिशा सालियान की मौत से जुड़े उपलब्ध दस्तावेजों, सबूतों और बयानों की जांच करेगी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस को मामले से संबंधित दस्तावेज और सामग्री CBI को सौंपने का निर्देश दिया है। 

CBI जांच के बाद यह तय होगा कि मामले में कोई अपराध बनता है या नहीं। अगर जांच में अपराध के पर्याप्त सबूत मिलते हैं तो संबंधित अदालत के सामने उचित रिपोर्ट दाखिल की जाएगी। अगर ऐसा कोई अपराध सामने नहीं आता है तो CBI summary report दाखिल कर सकती है। 

निष्कर्ष

सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला छह साल बाद भी लोगों की दिलचस्पी का विषय बना हुआ है। 2025 में CBI ने सुशांत केस में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर आत्महत्या के निष्कर्ष के साथ आपराधिक साजिश की संभावना को खारिज किया था। वहीं 2026 में दिशा सालियान की मौत के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI ने नई FIR दर्ज कर जांच शुरू की है। 

फिलहाल दिशा सालियान मामले की जांच शुरुआती चरण में है। इसलिए सामने आ रहे दावों और आरोपों को अंतिम सच मानने के बजाय CBI की जांच और अदालत की आगे की कार्रवाई का इंतजार करना जरूरी है।




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Saturday, December 20, 2025

GKFTII और T-Series StageWorks Academy में हुआ लाइव म्यूज़िक कॉन्सर्ट का भव्य आयोजन | अख्तर ब्रदर्स की शानदार प्रस्तुति ने जीता छात्रों का दिल




संवाददाता - रोहिणी राजपूत

नोएडा | 19 दिसंबर 2025


गुलशन कुमार फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (GKFTII) और T-Series StageWorks Academy द्वारा फिल्म सिटी, नोएडा परिसर में एक भव्य लाइव म्यूज़िक कॉन्सर्ट का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को रचनात्मक संगीत वातावरण प्रदान करना और उन्हें व्यावहारिक व कलात्मक अनुभवों से जोड़ना था।

यह आयोजन छात्रों, फैकल्टी और अतिथियों के लिए एक यादगार अनुभव बनकर उभरा।














अख्तर ब्रदर्स की शानदार प्रस्तुति ने जीता दिल

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहे सुप्रसिद्ध गायक अख्तर ब्रदर्स, जिन्होंने लगभग डेढ़ घंटे तक अपनी सुमधुर आवाज़ में एक से बढ़कर एक गीत प्रस्तुत किए। उनकी प्रभावशाली गायकी ने पूरे माहौल को संगीत और ऊर्जा से भर दिया।

छात्रों और फैकल्टी सदस्यों ने पूरे उत्साह के साथ उनकी प्रस्तुति का आनंद लिया और लगातार तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।














छात्रों की वाद्य प्रस्तुतियों ने बढ़ाया कार्यक्रम का आकर्षण

T-Series StageWorks Academy के विद्यार्थियों ने विभिन्न वाद्य यंत्रों पर लाइव प्रस्तुतियाँ देकर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। वाद्य संगीत ने कार्यक्रम को और भी जीवंत बना दिया तथा छात्रों के कौशल और प्रशिक्षण को मंच पर प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया।

विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम में कई विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रही, जिनमें शामिल थे:

  • हितेश रल्हान, निदेशक, GKFTII

  • डॉ. दीप्ति त्रिवेदी, उपाध्यक्ष

  • संजय विद्यार्थी (संगीतकार),

  • राहुल त्रिपाठी (जनरल मैनेजर- ब्रांड)

अतिथियों ने अख्तर ब्रदर्स को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया और छात्रों को कला व संगीत के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।














छात्रों में दिखा उत्साह और सकारात्मक अनुभव

कार्यक्रम के दौरान छात्रों में अपार उत्साह और ऊर्जा देखने को मिली। संगीत, ताल और वादन से सजे इस आयोजन ने छात्रों को एक ऐसा मंच प्रदान किया, जहाँ वे मनोरंजन के साथ-साथ सीखने का अनुभव भी प्राप्त कर सके।

कई छात्रों ने साझा किया कि इस तरह के लाइव कार्यक्रम उन्हें आत्मविश्वास बढ़ाने, मंच अनुभव हासिल करने और रचनात्मक रूप से विकसित होने में मदद करते हैं।


GKFTII: रचनात्मकता, कला और करियर विकास का केंद्र

GKFTII रचनात्मकता, कला और अवसरों का एक प्रमुख केंद्र है, जो अपने छात्रों को निरंतर अनुभवात्मक शिक्षण के अवसर प्रदान करता है। संस्थान नियमित रूप से सांस्कृतिक, संगीत और इंडस्ट्री-ओरिएंटेड कार्यक्रमों का आयोजन करता है, जिससे छात्र वास्तविक पेशेवर माहौल को समझ सकें।

यहाँ छात्रों को न केवल अपने कौशल को निखारने का अवसर मिलता है, बल्कि उद्योग विशेषज्ञों के साथ संवाद कर वे अपने करियर को एक सशक्त दिशा भी प्रदान करते हैं।














GKFTII, नोएडा में आयोजित यह लाइव म्यूज़िक कॉन्सर्ट न केवल एक मनोरंजक आयोजन रहा, बल्कि छात्रों के लिए एक प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद अनुभव भी सिद्ध हुआ। कलाकारों की प्रस्तुति और छात्रों की भागीदारी ने इस कार्यक्रम को पूरी तरह सफल और यादगार बना दिया।













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Sunday, November 17, 2024

दिल्ली मेट्रोपॉलिटन एजुकेशन (डीएमई) मीडिया स्कूल ने अपने 9वें वार्षिक मीडिया सम्मेलन और उत्सव, 'वृतिका 2024', का भव्य आयोजन किया।





नोएडा, 14 नवंबर 2024:

 दिल्ली मेट्रोपॉलिटन एजुकेशन (डीएमई) मीडिया स्कूल ने अपने 9वें वार्षिक मीडिया सम्मेलन और उत्सव, 'वृतिका 2024', का भव्य आयोजन किया। इस दो दिवसीय कार्यक्रम का उद्देश्य मीडिया उद्योग की बदलती प्रवृत्तियों और उनके सामाजिक प्रभाव पर चर्चा करना था। कार्यक्रम में मीडिया जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों ने शिरकत की और छात्रों को ज्ञानवर्धक व प्रेरणादायक विचारों से समृद्ध किया।



उद्घाटन समारोह

'वृतिका 2024' का शुभारंभ 13 नवंबर को नोएडा के नेल्सन मंडेला ऑडिटोरियम में हुआ। उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि 'श्री अशोक श्रीवास्तव' (प्राइम टाइम एंकर, डीडी न्यूज़), 'श्री राहुल दाबास' (स्पेशल कॉरेस्पोंडेंट सह एंकर, न्यूज़ नेशन), 'श्री गगनदीप चौहान' (वर्ल्ड पंजाबी टीवी) और 'सुश्री साक्षी लिथोरिया' (सीएनएन न्यूज़) रहे।



कार्यक्रम की शुरुआत 'डीएमई मीडिया स्कूल की प्रमुख डॉ. पारुल मेहरा' के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने 'वृतिका' की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह मंच छात्रों को सीखने और अपने कौशल को निखारने का अनूठा अवसर प्रदान करता है। डीएमई के महानिदेशक ' माननीय जस्टिस भंवर सिंह' ने मीडिया और पत्रकारिता के सिद्धांतों जैसे सत्यता, निष्पक्षता और सटीकता पर जोर दिया।



कार्यक्रम के दौरान 'गणेश विद्यार्थी पुरस्कार' से मुख्य अतिथियों को सम्मानित किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में 'गणेश वंदना, राजस्थानी नृत्य' और 'भांगड़ा' ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।


'समापन समारोह'

14 नवंबर को डीएमई के एम्फीथिएटर में समापन समारोह का आयोजन हुआ। इस दो दिवसीय उत्सव के दौरान छात्रों ने कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया, जिनमें पत्रकारिता, पब्लिक स्पीकिंग और फिल्म मेकिंग शामिल थीं। समापन दिवस के मुख्य अतिथि 'श्री अखिलेश आनंद' (न्यूज़ एंकर, एबीपी न्यूज़) और 'आरजे अतिशय' (रेडियो जॉकी, इश्क एफएम 104.8) रहे। उन्होंने छात्रों को मीडिया उद्योग में अवसरों का लाभ उठाने और अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा दी।



समापन समारोह की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में 'पौराणिक नाट्य प्रस्तुति', 'दक्षिण भारतीय नृत्य', और 'राजस्थानी लोक नृत्य' शामिल थे, जिन्होंने उत्सव को और रंगीन बना दिया। कार्यक्रम का समापन 'गायक श्री नितिन शर्मा के बैंड' की शानदार प्रस्तुति के साथ हुआ।



















Wednesday, May 29, 2024

वीर सावरकर की वीरगाथाः काले पानी की सजा से लेकर स्वतंत्रता के संघर्ष तक

 संवाददाता - रोहिणी राजपूत




वीर सावरकर, जिनका पूरा नाम विनायक दामोदर सावरकर था, भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, लेखक, और समाज सुधारक थे। उनका जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के भगूर गांव में हुआ था। सावरकर का जीवन देशभक्ति और संघर्ष की मिसाल है।
सावरकर की शिक्षा में बहुत रुचि थी और उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नासिक में पूरी की। इसके बाद उन्होंने पुणे के फग्र्युसन कॉलेज से स्नातक किया। उच्च शिक्षा के लिए वे इंग्लैंड गए और वहाँ उन्होंने कानून की पढ़ाई की। वहीं पर उन्होंने 'फ्री इंडिया सोसाइटी की स्थापना की और भारतीए छात्राओं को स्वतंत्रता संग्राम के लिए प्रेरित किया।
वीर सावरकर का सबसे महत्वपूर्ण योगदान 1857 के स्वतंत्रता संग्राम पर लिखी गई पुस्तक 'द फर्स्ट वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस' है, जिसमें उन्होंने इस संग्राम को भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम बताया। इस पुस्तक ने भारतीय युवाओं में स्वतंत्रता की भावना जगाई और अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति की लहर को तेज किया।











वीर सावरकर का नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है। उनकी बहादुरी और राष्ट्रभक्ति के कई किस्से हैं, लेकिन अंडमान की सेल्यूलर जेल की कालकोठरी में उनकी एक विशेष वक्तव्य हैं जो बहुत कम लोग जानते हैं।
1909 में, सावरकर को अंग्रेजी सरकार के खिलाफ षड्यंत्र करते और देशद्रोही गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। उन्हें काले पानी की सजा सुनाई गई और अंडमान के सैल्यूलर जेल भेजा गया। वहाँ उन्होंने 10 साल कठोर कारावास में बिताए। जेल में भी उन्होंने अपने क्रांतिकारी विचारों को नहीं छोड़ा और लगातार स्वतंत्रता संग्राम के लिए प्रेरणा देते रहे।
अग्रेजी हुकू‌मत उनके क्रांतिकारी गतिविधियों से परेशान थी। 1909 में, उन्हें नासिक कांस्पिरेसी केस से गिरफ्तार कर लिया गया और 1910 में उन्हें काले पानी की सजा सुनाई गई। सावरकर
को अंडमान और निकोबार ‌द्वीप समूह की कुख्यात सेल्यूलर जेल में भेज दिया गया। यह जेल भारत की सबसे कठोरतम जेल मानी जाती थी, जहाँ पर राजनैतिक कैदियों को अमानवीय यातनाएं दी जाती थीं।













सेल्युलर जेल की कठोरतम परिस्थितियों में भी सावरकर ने हार नहीं मानी। एक दिन, उन्हें अपनी कालकोठरी में अकेले बैठकर स्वतंत्रता संग्राम की योजनाएँ बनाने का विचार आया। लेकिन समस्या यह थी कि जेल में लिखने की सामग्री नहीं थी। तब उन्होंने अपनी तीव्र बु‌द्धि का इस्तेमाल किया और जेल की दीवारों की ही कागज और अपनी नाखूनों को कलम बना लिया।
सावरकर ने जेल की दीवारों पर अपनी कविताएँ और लेख लिखना शुरु किया। उनकी कविताएँ इतनी प्रभावशाली थी कि उनके साथी कैदी भी उनसे प्रेरणा लेते थे। वे अपनी कविताओं में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महत्व और देशभक्ति की भावना को उकेरते थे। उनकी एक प्रसिद्ध कविता "ने मजसी ने परत मातृभूमीला, सागरा प्राण तळमळला' ने जेल के अंदर भी आजादी की लौ जलाए रखी।














जेलर और गार्ड्स ने जब दीवारों पर लिखी हुई कविताएँ देखी, तो उन्होंने सावरकर को और कठोर दंड देने का प्रयास किया। लेकिन सावरकर का हौसला और उनकी राष्ट्रभक्ति की भावना को वे तोड़ नहीं पाए। सावरकर ने जेल में अपने दस साल के कारावास के दौरान अनेक रचनाएँ की, जिन्हें बाद में उनके अनुयायियों ने प्रकाशित किया।
सावरकर की यह अदम्य इच्छा शक्ति और संघर्ष की भावना ने न केवल उनके साथी कैदियों को बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित किया। उन्होंने अपने अ‌द्वितीय और साहसी कार्यों से साबित कर दिया कि सच्चे देशभक्त को कोई भी बाधा रोक नहीं सकती।



जेल से रिहा होने के बाद भी सावरकर ने समाज सुधार और हिंदू महासभा के माध्यम से देश की सेवा की। वे एक सच्चे राष्ट्रभक्त थे, जिन्होंने भारतीय समाज को एकता और समानता का संदेश दिया। उनका जीवन संघर्ष, त्याग और देशभक्ति की अ‌द्वितीय मिसाल है।
26 फरवरी 1966 को वीर सावरकर का निधन हो गया, लेकिन उनका योगदान और उनकी देशभक्ति आज भी हमें प्रेरित करती है। वीर सावरकर का नाम भारतीय इतिहास में सदैव अमर रहेगा। वे एक महान क्रांतिकारी, लेखक और समाज सुधारक के रूप में सदैव स्मरणीय रहेंगे।




























Tuesday, May 21, 2024

"Capturing Life's Essence: Lensman Pradeep's Campaign Unveiled"

 











"Behind the Lens: Namaste PR campaign panelists in action."


Delhi Metropolitan Education, Noida 62, May 14th, 2024: In a captivating event held at Delhi Metropolitan Education, Noida 62, the Namaste PR team unveiled their latest campaign in collaboration with renowned photographer Lensman Pradeep. The press conference, attended by esteemed members of the press, provided an insightful glimpse into the inspiration and objectives driving this innovative venture.


Lensman Pradeep, revered for his expertise in celebrity photography spanning five years, took the stage to articulate the ethos behind the campaign. His passion for encapsulating life's essence through the lens resonated as he elaborated on the narrative power of each photograph.



Journalists engaged in a lively Q&A session, delving into the intricacies of the campaign. Rohini Rajpoot from Zee News probed Lensman Pradeep's illustrious career, drawing insights into his journey of capturing luminaries like Ranbir Kapoor, Rajkumar Rao, Kriti Sanon, and others.


Srijan from Dainik Jagran sought clarification on the campaign's necessity, prompting Lensman Pradeep to illuminate the aspiration to broaden his audience beyond celebrities, citing time constraints as a driving factor.


Kanak from AAJ TK delved into the campaign's core objectives, with Samiksha Tiwari, Associate Photographer, delineating the focus on delivering exceptional services, fostering a robust brand identity, and implementing effective marketing strategies. 












Kanishka Rajora from Doordarshan scrutinized the campaign's outcomes, to which Navya Saxena, Assistant Photographer, affirmed the resounding success achieved through meticulous planning and unwavering dedication.


The press conference culminated with expressions of gratitude from the moderator to Lensman Pradeep and the attending journalists. As the event concluded, it underscored the collaborative spirit driving the Namaste PR campaign and set the stage for a new chapter in the world of photography.


For further inquiries or interviews, please contact the Namaste PR team.























Sunday, April 14, 2024

राम हमें द्वेष करना नहीं, द्वेष ख़त्म करना सिखाते है : डॉ. कृष्ण गोपाल*

 










नोएडा:  प्रेरणा शोध संस्थान न्यास, द्वारा भाऊराव देवरस सरस्वती विद्या मंदिर में प्रेरणा विमर्श अथिति वक्ता  मिलन समारोह का आयोजन किया गया। मिलन समारोह में प्रेरणा विमर्श के सभी अथितियों ने संवाद के माध्यम से अपने-अपने अनुभवों को साझा किय। इस कार्यक्रम में मुख्य अथिति  सह सरकार्यवाह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा की आगे एक लंबी यात्रा है और उसकी तैयारी हमें करनी होगी। हमारा देश विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता और संस्कृति वाला देश है। वहीं उन्होंने बताया कि कैसे बाहरी लोगों ने भारत को अपने विचारों के जरिए भ्रमित किया और आज भारत में एक ऐसा समुदाय बन गया है जो अब उनकी ही भाषा बोलने लगा है।















मुख्य अथिति डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि जो लोग दुख के साथ यहां आए थे उन्हें हिंदुओं ने ही इस देश में बसाया है। हिंदुत्व की अंतरात्मा ही अध्यात्म है। वहीं पूर्व वीसी चौधरी चरण सिंह विश्व विद्यालय प्रोफेसर नरेंद्र तनेजा जी कहा की जहां लोग खुद को हिंदू कहने से डरते थे वहीं आज वो खुद को गौरवान्वित हिंदू बताते हैं। हिंदुत्व का उदार रूप, सर्वव्यापक रूप पूरे विश्व में स्थापित हुआ है। हमारे यहां हिंदुइज्म का स्थान नहीं है हिंदुत्व का स्थान है। साथ ही उन्होंने कहा हिंदुत्व समाज और मानव विकास का सबसे बड़ा तत्व है।कार्यक्रम के सायोजक डॉ. अनिल त्यागी व मंच का संचालन डॉ. नीलम व डॉ. प्रियंका के द्वारा किया गया।

 

 द्वित्य सत्र  













प्रेरणा शोध संस्थान न्यास द्वारा भाऊराव देवरस सरस्वती विद्या मंदिर में गोष्ठी एवं प्रेरणा विमर्श 2023 की स्मारिका विमोचन का आयोजन किया गया। मंच पर उपस्थित अतिथि डॉ. कृष्ण गोपाल, सह सरकार्यवाह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, माननीय सूर्यप्रकाश टोंक जी, क्षेत्र संघचालक, सुप्रसिद्ध लोकगायिका श्रीमती मालिनी अवस्थी जी उपस्थित रहीं।
मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री कृष्ण गोपाल जी ने वहां उपस्थित होकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई तथा अपने उद्बोधन में कहा की ये केवल मंदिर नही है, ये लोगो की आत्मा का संरक्षण है। राम हमे द्वेष करना नही, द्वेष खत्म करना सिखाते है।
वहीं कार्यक्रम में उपस्थित प्रसिद्ध लोकगायिका श्रीमती मालिनी अवस्थी जी ने श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा पर अपने अनुभवों को प्रस्तुत करते हुए उन्होंने अपने बचपन में राम मंदिर के निर्माण के संघर्षों को आँखों देखा और कानों सुने, उस वक्त के राम भक्तों का संघर्ष और दर्द, अपने मार्मिक शब्दों के द्वारा अभिव्यक्त करा। बताया कि २२ जनवरी २०२४ राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा लोगों के लिए एक नया जन्म था, वह दिन सबसे सुंदर, सौम्य और पूरे विश्व के लिये सौभाग्यशाली दिन था। उन्होंने कहा कि जो राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में उपस्थित था उसमें प्रभु श्री राम की छवि परिलिक्षित हो रही थी । राम मंदिर के इतिहास और प्राण प्रतिष्ठा के अनुभवों को बताते हुए वह भावुक भी हो गई। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने आप को बहुत सौभाग्यशाली मानती है कि उन्हें राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में गीत गाने का अवसर मिला और उन्हीं कुछ गीतों की पंक्तियाँ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपनी गायकी से सभा को मनमोहित किया।अंतिम पंक्तियों में उन्होंने बोला की भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा का पूरा श्रेय माता जानकी को जाता है और इसलिए समाज में मातृशक्ति पूजनीय और समानिये मानी जाती है। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि मालिनी अवस्थी द्वारा सेक्टर 62 स्थित प्रेरणा भवन में वृक्षारोपण भी किया गया। 
सूर्यप्रकाश टोंक जी ने भी राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के अनुभवों को मंच से साझा किया और कहा कि जो उन्होंने वहाँ मंदिर में महसूस करा था वह हर भारतीय ने अपने घर बैठकर भी गौरवान्वित किया।














प्रेरणा शोध संस्थान न्यास की अध्यक्ष श्रीमती प्रीति दादू जी ने मंच आसीन एवं कार्यक्रम में आए सभी अथितियों का धन्यवाद ज्ञापन किया तथा कहा जो भी सुझाव आज इस संवाद के माध्यम से हमें प्राप्त हुए है उन सब पर प्रेरणा की ओर से ध्यान देकर कार्य किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती मोनिका चौहान जी द्वारा किया गया।


कार्यक्रम के सायोजक डॉ. शुभ्रांशु झा जी व मंच के संचालक मोनिका चौहान जी के द्वारा किया गया। प्रेरणा विमर्श 2023 की स्मारिका के विमोचन के साथ ही प्रेरणा विचार पत्रिका का भी विमोचन हुआ।


कार्यक्रम में उपस्थित रहे सभी गणमान्य लोगों की उपस्थिति ने आज के कार्यक्रम की शोभा बढ़ाकर उसको सफल बनाया, व स्वयं को प्रेरणा विमर्श से जुड़े रहने के लिए भाग्यशाली बताया। इस कार्यक्रम के दौरान यह गणमान्य लोग उपस्थित रहे - कृपाशंकर जी संयुक्त क्षेत्र प्रचार प्रमुख, प्रदीप जोशी जी अखिल भारतीय सहप्रचार प्रमुख, मधुसूदन दादू, महेंद्र जी, क्षेत्र प्रचारक पश्चिमी उत्तर प्रदेश, श्री सुभाष जी पुर्वी क्षेत्र सह प्रचार प्रमुख, श्री डॉ सुभाष जी पूर्व सूचना आयुक्त उत्तर प्रदेश, डॉ. मनमोहन सिंह जी, शिक्षक गौतमबुद्ध विश्व विद्यालय, डॉ. अनिल त्यागी जी प्रान्त सहप्रचार प्रमुख मेरठ प्रान्त।
























Sunday, March 31, 2024

स्प्रिंग डेल्स पब्लिक स्कूल का वार्षिकोत्सव: महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा

 रोहिणी राजपूत











*वसुंधरा:* स्प्रिंग डेल्स पब्लिक स्कूल ने 30 मार्च 2023 को अपने 26वें वार्षिकोत्सव एवं पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया। इस समारोह में नगर निगम के महापौर, राष्ट्रीय कवि एवं पत्रकार और स्कूल के बोर्ड सदस्यों सहित, नारी सशक्तिकरण के कई प्रतिष्ठित अतिथियों को आमंत्रित किया गया। इस समारोह में सभी विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों को आमंत्रित किया गया था।
















 समारोह का आयोजन सुबह 11:00 बजे किया गया, जिसमें स्कूल के डायरेक्टर द्वारा प्रारंभिक भाषण दिया गया और विशेष अतिथियों द्वारा दिया प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत हुई। डॉक्टर उदय रस्तोगी ने विद्यालय के उत्थान की कहानी को साझा करते हुए परिश्रम, संघर्ष, और सफलता का महत्व बताते हुए कहते हैं किस तरह विद्यालय को 1998 में शुरु किया, तब केवल 40 विद्यार्थी हुआ करते थे और आज एक हजार से भी ज्यादा छात्र छात्राएं हैं। महिला सशक्तिकरण के महत्व पर भी बल दिया।



















सुनील शर्मा चेयरमैन, प्रदीप शर्मा मैनेजर, स्प्रिंग डेल्स पब्लिक स्कूल ने समारोह में कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों का स्वागत किया, जैसे कि डॉ रिचा सूद, डॉ सुरुचि सैनी, श्रीमती निशि अग्रवाल, डॉ अलका अग्रवाल।

 इस वर्ष के वार्षिकोत्सव का विषय _*‘महिला सशक्तिकरण’*_ रखा गया था, जिस पर निधि रस्तोगी ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से जागरूकता बढ़ाई।















इस वार्षिकोत्सव एक महत्वपूर्ण कदम रहा महिला सशक्तिकरण की दिशा में, जो समाज में समानता और समृद्धि की दिशा में अग्रसर होने में सहायक हो सकता है। कार्यक्रम के पहले भाग में किंडरगार्टन से कक्षा 5 तक के छात्रों ने अपने सुंदर नृत्य और नाटक प्रदर्शन से सभी का मनोरंजन किया। वरिष्ठ छात्रों द्वारा महिला सशक्तिकरण पर नाट्य और नृत्य प्रस्तुत किया। इस मनमोहक प्रदर्शन को देखकर दर्शकों ने खड़े होकर तालियाँ बजाई और बहुत प्रशंसा भी की। इसके तुरंत बाद, स्कूल के छात्रों ने भारत की विवधताओ कि प्रस्तुति दी, हर राज्य के लोकनृत्य को दर्शाते हुए, भरतनाट्यम, गुज़राती, लावणी, राजस्थानी, उत्तराखंडी, भांगड़ा आदि नृत्य प्रस्तुत किया और सभी को थिरकने पर मजबूर कर दिया। गायन मंडली ने सुन्दर मधुर गीतों से दर्शकों एवं गणमान्य व्यक्तियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। माता-पिता मंच पर प्रस्तुति दे रहे अपने बच्चों का हौसला बढ़ाते रहे। छात्रों द्वारा तीन घंटे के शानदार प्रदर्शन के बाद, कार्यक्रम का समापन गणमान्य अतिथियों द्वारा छात्र छात्राओं को पुरुस्कार वितरण और धन्यवाद प्रस्ताव देने और वार्षिक दिवस समारोह में उपस्थित सभी लोगों को हार्दिक बधाई देने के साथ हुआ।






















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