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Monday, March 11, 2024
Tuesday, February 6, 2024
लोकसभा से पास हुआ पेपर लीक के खिलाफ बिल, 10 साल की जेल और करोड़ों रुपए का जुर्माना जैसे कई सख्त प्रावधान
संवाददाता - रोहिणी राजपूत
अक्सर आपने परीक्षाओं और प्रतियोगी परिक्षाओं में नकल, पेपर लीक जैसे गलत कामों के बारे में सुना होगा। इनसे न सिर्फ नतीजे देरी से आते थे, बल्कि कई बार परीक्षाएं ही रद्द हो जाती थी। लेकिन अब इन सब गलत कामों पर लगाम लगने वाली है। दरअसल, सरकारी भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और फर्जी वेबसाइट जैसी अनियमितताओं के खिलाफ तीन साल से 10 साल तक की जेल और न्यूनतम एक करोड़ रुपये के जुर्माने के प्रावधान वाले लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) विधेयक, 2024' को मंगलवार को लोकसभा ने पारित कर दिया है।
पेपर लीक क्या है?
कुछ लोगों के लिए पेपर लीक होना बहुत साधारण बात हो सकती है, वो सोच सकते हैं कि एक परीक्षा है कुछ बच्चे पेपर दे रहे थे और किसी ने उसे लीक कर दिया लेकिन ऐसा नहीं है। पेपर लीक वो दीमक है जो पूरी युवा पीढ़ी को खोखला बना देता है, पेपर लीक करके गलत लोगों का चयन कराया जाता है, कुछ ऐसे लोग अफसर बनते हैं, डॉक्टर बनते हैं, इंजीनियर जो योग्य नहीं है, इसे आप योग्यता घोटाला भी कह सकते हैं। अयोग्य व्यक्ति पैसे खर्च करके पेपर लीक के जरिए बिना पढ़े उस जगह पर पहुंच जाता है, जिसके योग्य वो है ही नहीं।
अगर कोई अयोग्य व्यक्ति पेपर लीक की मदद से डॉक्टर बन जाएगा तो क्या ऑपरेशन करेगा, कोई अयोग्य व्यक्ति इंजीनियर बन जाएगा तो वो किस तरह के पुल बनाएगा, कैसी इमारतें बनाएगा। तो पेपर लीक कोई छोटा-मोटा अपराध नहीं है बल्कि ये पूरी की पूरी पीढ़ी को बर्बाद करने की इंडस्ट्री है। जिसमें हर साल करोड़ों रुपए, दांव पर लगते हैं और कुछ लोग देश की इस बर्बादी के बदले तिजोरियां भरते हैं।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने ये विधेयक लोकसभा में पेश किया। उन्होंने कहा, 'अभी केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों के पास परीक्षाओं में पेपर लीक या नकल जैसे अपराधों से निपटने के लिए कोई ठोस कानून नहीं है। इसलिए यह जरूरी है कि परीक्षा प्रणाली की कमजोरियों का फायदा उठाने वालों की पहचान की जाए और उनसे सख्ती से निपटा जाए।'
4 साल तक के लिए एग्जाम सेंटर होगा सस्पेंड:
अगर किसी गड़बड़ी में एग्जाम सेंटर की भूमिका पाई जाती है तो उस सेंटर को 4 साल के लिए सस्पेंड किया जाएगा। यानी उस सेंटर को अगले 4 साल तक के लिए कोई भी सरकारी एग्जाम कराने का अधिकार नहीं होगा।
इसके अलावा परीक्षा में गड़बड़ी कराने में मिलीभगत पाए जाने पर सेंट्रल एजेंसी पर भी 1 करोड़ तक का जुर्माना लगेगा। बिल में जेल की सजा का भी प्रावधान है।
परिक्षाओं में नकल करना अपराध:
उन्होंने कहा, हमारी माता-पिता और बच्चों से अपील है कि बदलते नये युग में प्रधानमंत्री की दूरदृष्टि के अनुरूप विकसित भारत' के निर्माण में योगदान करने के लिए समर्पित हों।'' विधेयक में कहा गया है, 'प्रश्न पत्र या उत्तर कुंजी का लीक होना', 'सार्वजनिक परीक्षा में अनधिकृत रूप से किसी भी तरीके से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उम्मीदवार की सहायता करना' और 'कंप्यूटर नेटवर्क या कंप्यूटर संसाधन या कंप्यूटर सिस्टम के साथ छेड़छाड़ करना' किसी व्यक्ति, लोगों के समूह या संस्थानों द्वारा किए गए अपराध हैं।
विधेयक के दायरे में यूपीएससी, एसएससी, रेलवे द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षाएं, बैंकिंग भर्ती परीक्षाएं और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित सभी कम्प्यूटर आधारित परीक्षाएं आएंगी। इसमें नकल पर रोकथाम के लिए न्यूनतम तीन साल से पांच साल तक के कारावास और इस तरह के संगठित अपराध में शामिल लोगों को पांच से 10 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है। प्रस्तावित कानून में न्यूनतम एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।
करियर के विकल्प चुनने का अवसर मिलेगा:
कानून के नियम बनाते समय सरकार की योजना विशेषज्ञों की एक ऐसी समिति बनाने की है जो प्रौद्येागिकी के आधार पर इसे समय समय पर अद्यतन करे और जानकारी बढ़ाएं। सिंह ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए कहा कि योग्यता, प्रतिभा और परिश्रम के आधार पर उन्हें अवसर मिलने चाहिए और नई शिक्षा नीति के तहत उन्हें हर तरह के विषय पढ़ने और करियर के विकल्प चुनने का अवसर मिलेगा।
Saturday, February 3, 2024
1971 में पाक को खदेड़ बांग्लादेश बनाने वाले, निडर साहसी सैम बहादुर की कहानी
संवाददाता - रोहिणी राजपूत
Field Marshal Sam Manekshaw भारतीय सेना के पहले फील्ड मार्शल जनरल सैम मानेकशॉ का जन्म 3 अप्रैल 1914 को हुआ था। आइए जानते है एक ऐसे व्यक्ति की कहानी जिसने इंडियन आर्मी के इतिहास में अपना नाम दर्ज़ किया और इसे मिटा पाना नामुमकिन है। एक ऐसे शख्स जो निडर, साहसी और अत्याधिक बहादुर किस्म के थे, जिन्हें ना तो अपने पद की चिंता थी, ना ही पदवी की, चिंता थी तो बस हिंदुस्तान की। यह वह नाम है जो ना तो दुश्मनों की गोलियों से डरा और ना ही इन्दिरा गांधी जैसी एकाधिकारी रखने वाली लीडर से।
यह कहानी हैं भारत माता के वीर सपूत सैम बहादुर की, जिनके सीने से निकली हर सांस जय हिंद का सुर लगाती थी।
सैम का जन्म ही एक आर्मी मैन बनने के लिए हुआ था। एक ऐसा आर्मी मैन जो निडर, निर्भीक और मौत की आंखों में आंखे डालकर दुश्मन से लोहा लेने का जज़्बा रखता था।
उनकी प्रारंभिक शिक्षा अमृतसर और शेरवुड कॉलेज नैनीताल में हुई थी। मानेकशॉ भारतीय सैन्य अकादमी के लिए चुने जाने वाले 40 कैडेटों के पहले बैच के थे और उन्हें 4 फरवरी 1934 को 12 एफएफ राइफल्स में कमीशन किया गया था।
बर्मा के खिलाफ लिया था युद्ध में भाग
इसका परिचय सैम बहादुर ने Second World War में 1942 में दिया। उस दौरान युद्ध के हालात और shortage of staff को देखते हुए मानेकशॉ को प्रमोशन दिया, इस जिम्मेदारी के साथ ब्रिटिश इंडिया आर्मी के यंग कैप्टन के रूप में बर्मा में नियुक्त किया गया। इसी दौरान वह बर्मा में Sittang River के किनारे जापानी आर्मी से लोहा ले रहे थे। जहां दोनों दलो के बीच काफी भीषण युद्ध छिड़ा हुआ था।
द्वितीय विश्व युद्ध में लगी थीं 9 गोलियां
जापानी सैनिक द्वारा मशीन गन से फायर की गई 9 गोलियां सैम मानिकशॉ के lungs, stomach, liver, intestine और kidneys को छेद करते हुए आर–पार हो गई, मगर ऐसी हालत के बावजूद भी सैम 36 घंटो तक युद्ध के मैदान पर Unconscious State में पड़े रहें।
उसके बाद उनके सिख बटालियन के भारतीय सिपाही शेर सिंह ने उन्हें अपने कंधे पर टांग कर पास के मेडिकल कैंप में ले गए, सैम की हालत देखकर डॉक्टर ने अपने हाथ खड़े कर दिए और इसे फिनिश केस घोषित कर दिया।
लेकिन सिपाही शेर सिंह डॉक्टर से सैम बहादुर को ठीक करने की मिन्नते मांगते रहे। इसी दौरान अचानक सैम को होश आ गया। कैंप में मौजूद सर्जन ने आश्चर्यजनक होकर शेर सिंह से पूछा– आखिर इसे हुआ क्या? सैम ने बहुत ही मजाकिया अंदाज में जवाब दिया और मुस्कुराते हुए बोले "डॉक्टर मुझे गधे ने लात मार दी है।"
बता दे की, 1947 में भारत-पाकिस्तान बंटवारे के दौरान पारसी समाज के सैम बहादुर के पास यह मौका था कि, वह चाहते तो पाकिस्तान आर्मी जॉइन कर सकते थे लेकिन उन्होंने इंडियन आर्मी को ही चुना।
इसके बाद उन्हें गोरखा राइफल्स में तैनात कर दिया गया, जहां सोल्जर में सैम मानेकशॉ के नाम को एक नाम दिया था "सैम बहादुर"। सैम बहादुर ने कई जंग में अपनी अहम भूमिका निभाई चाहे वह समय जब पाकिस्तान ने ट्राइबल रिबेलियंस की आड़ में कश्मीर घाटी पर हमला कर दिया हो या 1962 में INDO–SINO का युद्ध हों, जहां भारत की सेना बैकफुट पर थी। इसी बीच तेजी से बदलती घटनाक्रम के चलते कमांडिंग के 4 कॉप्स जनरल ऑफिसर लेफ्टिनेंट जनरल ब्रिज मोहन कॉल को हटाकर नॉर्थ ईस्ट का मोर्चा संभालने खुद जनरल सैम मानेकशॉ को भेजा गया।
इंदिरा गांधी का विरोध करने में सबसे आगे
जब साल 1971 में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सैम मानेकशॉ से लड़ाई के लिए तैयार रहने पर सवाल किया था। इस बात के जवाब में सैम मानेकशॉ ने कहा था, ‘आई एम ऑलवेज रेडी, स्वीटी।
1971 की लड़ाई में इंदिरा गांधी चाहती थीं कि वह मार्च में ही पाकिस्तान पर चढ़ाई कर दें, लेकिन सैम ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, क्योंकि भारतीय सेना हमले के लिए तैयार नहीं थी।
इंदिरा गांधी इससे नाराज हुईं थी। मानेकशॉ ने पूछा कि अगर आप युद्ध जीतना चाहती हैं तो मुझे छह महीने का समय दीजिए। मैं गारंटी देता हूं कि जीत हमारी ही होगी।
3 दिसंबर को फाइनली वॉर शुरू हुआ। सैम ने पाकिस्तानी सेना को सरेंडर करने को कहा, लेकिन पाकिस्तान नहीं माना। 14 दिसंबर, 1971 को भारतीय सेना ने ढाका में पाकिस्तान के गवर्नर के घर पर हमला कर दिया।
इसके बाद 16 दिसंबर को ईस्ट पाकिस्तान आजाद होकर ‘बांग्लादेश’ बन गया। इसी जंग में पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों ने आत्मसमर्पण भी किया।
1972 में मानिकशॉ को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया और 1973 में उन्हें फील्ड मार्शल से नियुक्त किया गया।
27 जून, 2008 को सैम बहादुर (94) वर्ष की आयु में निमोनिया से लड़ते हुए परमात्मा में विलीन हो गए। भारतीय इतिहास में सैम मानिकशॉ उर्फ सैम बहादुर के जज्बे को कोई तोड़ नहीं सकता क्योंकि उनके आखिरी शब्द– "आई एम ओके" थे।
Friday, January 26, 2024
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन: राम मंदिर, G–20, महिला आरक्षण, कर्पूरी ठाकुर का भी किया जिक्र
संवाददाता - रोहिणी राजपूत
पचहत्तरवें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर मैं आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देती हूं। यह एक युगांतरकारी परिवर्तन का कालखंड है। गणतंत्र दिवस, हमारे आधारभूत मूल्यों और सिद्धांतों को स्मरण करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
75वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि हमारे गणतंत्र की मूल भावना से एकजुट होकर 140 करोड़ से अधिक भारतवासी एक कुटुंब के रूप में रहते हैं। दुनिया के सबसे बड़े इस कुटुंब के लिए, सह-अस्तित्व की भावना, भूगोल द्वारा थोपा गया बोझ नहीं है, बल्कि सामूहिक उल्लास का सहज स्रोत है, जो हमारे गणतंत्र दिवस के उत्सव में अभिव्यक्त होता है।
कर्पूरी ठाकुर का जीवन एक संदेशः मुर्मू
कर्पूरी ठाकुर का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि मैं यह उल्लेख करना चाहूंगी कि सामाजिक न्याय के लिए अनवरत युद्धरत रहे कर्पूरी ठाकुर जी की जन्म शताब्दी का उत्सव कल ही संपन्न हुआ है। कर्पूरी जी पिछड़े वर्गों के सबसे महान पक्षकारों में से एक थे जिन्होंने अपना सारा जीवन उनके कल्याण के लिए समर्पित कर दिया था। उनका जीवन एक संदेश था। अपने योगदान से सार्वजनिक जीवन को समृद्ध बनाने के लिए मैं कर्पूरी जी को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं।
भारत लोकतंत्र की जननीः राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
राष्ट्रपति ने कहा कि मैं देश को शुभकामनाएं देती हूं। कल के दिन हम संविधान के प्रारंभ का उत्सव मनाएंगे। संविधान की प्रस्तावना हम लोग से शुरू होती है। ये शब्द हमारे संविधान के मूल भाव को रेखांकित करते हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था पश्चिमी लोकतंत्र की अवधारणा से कहीं अधिक पुरानी है, इसीलिए भारत को ‘लोकतंत्र की जननी' कहा जाता है।
आज का भारत आत्मविश्वास के साथ बढ़ रहा" : गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति
राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे गणतंत्र की मूल भावना से एकजुट होकर 140 करोड़ से अधिक भारतवासी एक कुटुंब के रूप में रहते हैं। दुनिया के सबसे बड़े इस कुटुंब के लिए, सह-अस्तित्व की भावना, भूगोल द्वारा थोपा गया बोझ नहीं।
राम मंदिर न्यायिक प्रक्रिया में देश के लोगों की आस्था का प्रतिक
राष्ट्रपति ने कहा कि इस सप्ताह के आरंभ में हम सबने अयोध्या में प्रभु श्री राम के जन्मस्थान पर निर्मित भव्य मंदिर में स्थापित मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक समारोह देखा। भविष्य में जब इस घटना को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाएगा, तब इतिहासकार, भारत द्वारा अपनी सभ्यतागत विरासत की निरंतर खोज में युगांतरकारी आयोजन के रूप में इसका विवेचन करेंगे।
इसरो मिशन: आत्मनिर्भर भारत
इसरो के मिशन मून की चर्चा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला पहला देश बना। हमें अपने वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों पर सदैव गर्व रहा है, लेकिन अब ये पहले से कहीं अधिक ऊंचे लक्ष्य तय कर रहे हैं और उनके अनुरूप परिणाम भी हासिल कर रहे हैं।
महिला आरक्षण, महिला सशक्तिकरण
महिला आरक्षण पर राष्ट्रपति ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम',
महिला सशक्तीकरण का एक क्रांतिकारी माध्यम सिद्ध होगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि सरकार ने 81 करोड़ से अधिक लोगों को अगले पांच साल तक मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। संभवत:, इतिहास में यह अपनी तरह का सबसे बड़ा जन-कल्याण कार्यक्रम है।
अपनी वाणी को विराम देने से पहले, मैं न्यायपालिका और सिविल सेवाओं के सदस्यों को भी शुभकामनाएं देना चाहती हूं। विदेशों में नियुक्त भारतीय मिशनों के अधिकारियों और प्रवासी भारतीय समुदाय के लोगों को मैं गणतन्त्र दिवस की बधाई देती हूं। आइए, हम सब यथाशक्ति राष्ट्र और देशवासियों की सेवा में स्वयं को समर्पित करने का संकल्प करें। इस शुभ संकल्प को सिद्ध करने के प्रयास हेतु आप सभी को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं!
Monday, December 18, 2023
स्व' के आत्मबोध से ही भारत बनेगा विश्व गुरु
संवाददाता - रोहिणी राजपूत
ग्रेटर नोएडा
'स्व' के आत्मबोध से ही भारत विश्व गुरु बनेगा, क्योंकि भारत का 'स्व' ही विश्व कल्याण का मार्ग हैं। 'स्व' का आत्मबोध नहीं होने के कारण ही भारत को आक्रांताओं और अंग्रेजों ने आपस में लड़ाया और विभाजन कर भारत पर वर्षों तक शासन किया। यह विचार प्रेरणा विमर्श-2023 के तीसरे दिन आयोजन के समापन समारोह में प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक श्री जे नंद कुमार ने व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आज का युग सोशल मीडिया का युग है, जहां सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के विचार हैं। ऐसे में हमें ध्यान देना होगा कि कहीं हम फेक न्यूज के शिकार ना हो जाएं। हमे सोशल मीडिया पर कोई भी बात लिखने से पहले यह जांच कर लेनी चाहिए कि वह सही है या गलत। सोशल मीडिया पर सनातन धर्म का पक्ष-प्रतिपक्ष की स्थिति विषय पर अपना विचार प्रकट करते हुए नमो एप के टेक्नोक्रेट अनित्य श्रीवास्तव ने कहा कि आज के समय सोशल मीडिया एक अच्छा स्थान है जहां हम अपने धर्म के बारे में लिख सकते हैं। लेकिन हम सोशल मीडिया में क्या बोल रहे हैं, क्यों बोल रहे हैं और किससे बोल रहे हैं इस पर ध्यान देना होगा।
जब तक हमे अपने स्व का बोध नहीं होगा तब तक हम देश हित में सोशल मीडिया का सही से उपयोग नहीं कर पाएंगे। स्व का बोध होने के लिए हमें अपने धार्मिक ग्रंथ और पुस्तकों को पढ़ना होगा। सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर अपूर्वा सिंह ने कहा कि हमें सोशल मीडिया का उपयोग लोगों को जोड़ने के लिए करना चाहिए और अपने सांस्कृतिक नैतिक मूल्यों के विकास के लिए उपयोग करें, यही सोशल मीडिया की सफलता है।
भारत का 'स्व' वैश्विक चेतना का प्रतीक है। जान में जब जीवन मूल्यों का संस्कार जुड़ता है तो वह विद्या बन जाती है। वहीं अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ. ओम प्रकाश पांडेय ने कहा कि ज्ञान, विज्ञान के ऊपर प्रज्ञा है। जो अनुभूति जन्य है, उसी से स्व का आत्मबोध होगा। सत्र के अंतिम वक्ता वरिष्ठ पत्रकार रवि शंकर ने कहा कि आत्मबोध को भारतीय संदर्भ में वेदो उपनिषदों को आधार बनाकर समझना चाहिए। वहीं वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि जो चाहते थे कि भारत के किसान गरीब ही रहे उन्हीं लोगों ने एक एजेंडे के तहत कृषि कानून के खिलाफ माहौल बनाया। इस सत्र के अंतिम वक्ता वरिष्ठ पत्रकार हरीश वर्णवाल ने उदाहरण के माध्यम से एजेंडा सेटिंग पर प्रकाश डाला।
प्रेरणा विमर्श-2023 दद्वारा आयोजित प्रेरणा चित्र भारती का लीन दिवसीय फिल्मोत्सव सत्र सम्पन्न हुआ। जिसमें देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आए 200 से अधिक फिल्मों की स्क्रीनिंग के बाद चयनित फिल्मों के विजेताओं के नाम की घोषणा हुई। चयन समिति ने रचनात्मक डॉक्यूमेंट्री निर्माण प्रतियोगिता में दून फिल्म स्कूल देहरादून के छाव मुकेश कुमार को प्रथम पुरस्कार वहीं हिमालया विश्वविद्यालय के छात्र अनुराग वर्मा को द्वितीय एवं तिलक स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के छात्र लव कुमार को तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। लघु फिल्म निर्माण प्रतियोगिता में क्वांटम विश्वविद्यालय के छात्र देवास कनल को प्रथम, हिमालया विश्वविद्यालय के छात्र निशांत तंवर को द्वितीय एवं ललित कला अकादमी के छात्र हरिओम को तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। प्रेरणा चित्र भारती फिल्मोत्सव एवं रचनात्मक डॉक्यूमेंट्री निर्माण प्रतियोगिता में प्रेरणा सिंह, निर्भय कुमार, छाया सिंह, शिप्रा कुशवाहा, आकांक्षा त्रिपाठी, एवं मौहम्मद हमजा को विशेष पुरस्कार मिला। इस दौरान प्रसिदध फिल्म निर्देशक चितरंजन त्रिपाठी एवं डॉ. ओम प्रकाश सिंह के साथ नवोदित फिल्मकारों के साथ फिल्म निर्देशन और अभिनय के बारे में विस्तार से चर्चा हुई तथा भरतमुनि के भरतनाट्य शास्त्र को पढ़ने की सलाह दी गयी। मीडिया शिक्षक एवं छात्र विमर्श तथा नेशनल कांफ्रेंस के दौरान भारतीय जनसंचार संस्थान के प्रोफेसर डॉ. प्रमोद सैनी ने शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि हम अपने 'स्व' को भूल गए है हमारा दायित्व है कि भारत के 'स्व' को जगाने के लिए मीडिया के माध्यम से जामवंत की भूमिका का निर्वहन करें। सत्र के दूसरे वक्ता चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के प्रो. संजीव शर्मा ने कहा कि अगर भारत को जानना है तो, भारत को पढ़ने की जरूरत है।
इसके लिए भारत के साहित्यकारों, महापुरुषों, भूगोल और भारत से जुड़ी हुई हर बात को जानिए और उसे जनमानस के समक्ष रखिए। हम विश्व के बारे में बहुत कुछ जानते हैं परंतु अपने स्वयं के देश के बारे मैं नहीं। दूसरे सत्र के दौरान हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. बृजकिशोर कुठियाला ने कहा कि मानव जीवन में संवाद का अत्यंत महत्व है। प्राचीन काल में हमारे ऋषि मुनि वर्षों की तपस्या से जो ज्ञान अर्जित करते थे उसे कुंभ आदि मेली में दद्वितीय स्तर के तपस्वियों को प्रदान करते थे तथा वे दद्वितीय स्तर के तपस्वी समाज में तृतीय स्तर के तपस्वियों को वह सूचना देते थे और इस प्रकार से उनके माध्यम से वह सूचना जनमानस तक पहुंचती थी। भारतीय संवाद कला इसी शास्त्र का अंग है। हमें संवाद शास्त्री बनकर सकारात्मक संवाद स्थापित करना चाहिए। वर्तमान तकनीकी ने हमें एक संदेश को विभिन्न माध्यम से जनमानस के समक्ष रखने की क्षमता प्रदान कर दी है। मीडिया शिक्षक एवं अत्र विमर्श के अंतर्गत नेशनल कांफ्रेंस और पत्रकार प्रतिभा खोज परीक्षा का भी आयोजन हुआ। इस अवसर पर प्रोफेसर ब्रजकिशोर कुठियाला की पुस्तक विचार प्रवाह' का विमोचन हुआ। और शोधार्थियों द्वारा शोध पत्र भी प्रस्तुत हुए।
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय ग्रेटर नोएडा में चल रहे प्रेरणा विमर्श-2023 के तीसरे दिन चार आयामों के दो सत्रों के साथ समापन समारोह मे वरिष्ठ पत्रकार रुबिका लियाकत की प्रेरणा सम्मान 2023 में सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान मुझे देश विरोधियों से लड़ने का ताकत देता है। समापन सत्र के दौरान दिल्ली, उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों से आए पत्रकार, लेखक, मीडिया शिक्षक एवं छात्र छात्राएं उपस्थित रहे। विभिन्न जिम में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के प्रचार प्रमुख श्री कृपाशंकर जी, राज्य सभा सांसद श्रीमती कांता कर्दम, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय बेटर नोएडा के कुलपति श्री. रवीन्द्र कुमार सिन्हा जी, रजिस्ट्रार डॉ. विश्वास त्रिपाठी, श्री सूर्य प्रकाश टॉक (संघचालक परिश्धमी आर प्रदेश) प्रेरणा मीडिया विमर्ग-2023 आध्यक्ष डॉ. नरेन्द्र तनेजा, श्री सुरेन्द्र सिंह (प्रांत प्रचार प्रमुख मेरठ) श्री प्रीतम जी (समन्वयक, सह प्रचार प्रमुख, मेरठ प्रान्त), विभाग प्रचारक कृष्णा जी, प्रेरणा विमर्श के संयोजक प्रोफेसर विशेष गुप्ता, डॉ. प्रियंका सिंह, श्री रवि श्रीवास्तव, विजेन्द्र कुमार, धीरेन्द्र सेभवात्र, डॉ. नीना सिंह, श्री अनित त्यागी जी, श्रीमती सुरभि भदौरिया, श्री मनमोहन सिसोदिया. श्रीमति अनिता जोशी, डॉ. वंदना पां सहित मेरठ प्रांत के अलग-अलग विभागी से आए गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वहीं आज के समापन समारोह का संचालन मोनिका चौहान जी ने किया।
Sunday, December 3, 2023
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय सभागार में प्रेरणा विमर्श 2023 की कार्य समीक्षा पूरी
संवाददाता - रोहिणी राजपूत
ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय सभागार में प्रेरणा विमर्श 2023 की कार्य समीक्षा की गयी। प्रचार विभाग, मेरठ प्रांत/प्रेरणा शोध संस्थान न्यास, नोएडा व गौतम बुद्ध विश्व विद्यालय, ग्रेटर नोएडा के तत्वावधान में होने वाले प्रेरणा विमर्श – 2023 की तैयार को लेकर विस्तृत चर्चा की गयी। कार्यक्रम के दौरान आगामी 15, 16 एवं 17 दिसम्बर को होने वाले ‘स्व’ भारत का आत्मबोध: मीडिया विमर्श एवं फिल्म फेस्टिवल और 10 दिसम्बर को होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस की तैयारी पर कार्यक्रम के सभी समन्वयक एवं संयोजक ने अपनी आयाम से संबंधित तैयारियों का विवरण दिया।
कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के प्रचार प्रमुख श्री कृपाशंकर जी ने प्रेरणा विमर्श 2023 के सभी आयामों के समन्वयक एवं संयोजको से कार्यक्रम की तैयारियों का विवरण लिया तथा कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए मार्गदर्शन किया। उन्होंने बताया कि हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी प्रेरणा विमर्श कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है। यह कॉन्क्लेव तीन दिनों तक चलेगा। तीन दिवसीय यह विमर्श “स्व – भारत का आत्मबोध” विषय पर आधारित है। वहीं कार्यक्रम के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रचार प्रमुख श्री पदम सिंह जी ने बताया कि यह विमर्श दिनांक 15,16 एवं 17 दिसंबर 2023 को गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा के परिसर में आयोजित होगा। इसमें प्रतिदिन अलग-अलग विषयों पर विमर्श होगा। इस विमर्श में समाज के विशिष्ट लोगों का बौद्धिक मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
कार्यक्रम के दौरान आज गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय सभागार में प्रेरणा विमर्श 2023 की सफलता के लिए इससे जुड़े पत्रकार, समाजसेवी, लेखक, साहित्यकार एवं छात्रों ने अपनी सक्रिय भागीदारी निभायी। इस दौरान प्रेरणा विमर्श – 2023 की तैयारी की समीक्षा की गई। कार्यक्रम के दौरान अलग-अलग आयामों की टोली बैठक भी सम्पन्न हुई। जहाँ कार्यक्रम की सफलता के लिए कार्य योजना एवं अंतिम रूपरेखा की चर्चा और विमर्श हुआ। इस कार्यक्रम में श्री प्रीतम जी (समन्वयक, सह प्रचार प्रमुख, मेरठ प्रान्त), श्रीमती प्रीति दादू जी ( प्रेरणा शोध संस्थान न्यास की अध्यक्ष), श्री विशेष गुप्ता जी, डॉ. विश्वास त्रिपाठी रजिस्ट्रार गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय ग्रेटर नोएडा, श्रीमती मोनिका चौहान जी सहित मेरठ प्रांत के अलग-अलग विभागों से आए गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
Monday, November 27, 2023
चीन में फैली रहस्यमयी बीमारी, WHO का अलर्ट, भारत की तैयारी को लेकर बोले स्वास्थ्य मंत्री
संवाददाता - रोहिणी राजपूत
चीन इन दिनों तेजी से बढ़ती श्वसन संबंधी बीमारी की चपेट में है। इस रहस्यमयी बीमारी ने बच्चों को सबसे पहले चपेट में लिया है, जिससे हड़कंप मच गया। कोरोना महामारी भी चीन से फैली, जिस कारण पूरी दुनिया इस बार फिर से अलर्ट मोड में है।
यह बीमारी माइकोप्लाज्मा निमोनियाऔर इन्फ्लूएंजा फ्लू हैं।
*आखिर क्या है ये बीमारी ….?*
माइकोप्लाज्मा निमोनिया जिसे मिस्टीरियस निमोनिया कहा जा रहा है ये एक प्रकार के बैक्टीरिया के कारण होने वाली समस्या है जो मुख्यरूप से बच्चों को अपना शिकार बनाती है। इसके कारण सूखी खांसी, बुखार और शारीरिक मेहनत करने पर सांस की तकलीफ हो सकती है। माइकोप्लाज्मा निमोनिया के बैक्टीरिया सभी मानव रोगजनकों में से सबसे अधिक प्रचलित हैं।
माइकोप्लाज्मा निमोनिया स्कूल, कॉलेज परिसर और नर्सिंग होम जैसे भीड़-भाड़ वाले इलाकों में खांसने-छींकने से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स के संपर्क से तेजी से फैलता है। पांच साल से कम आयु के बच्चों, बुजुर्गों, कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों, फेफड़ों की बीमारी के शिकार, सिकल सेल एनीमिया वाले लोगों में इसका खतरा अधिक देखा जाता रहा है।
*भारत की तैयारियों को लेकर बोले, स्वास्थ्य मंत्री*
चीन में विशेषकर बच्चों में माइकोप्लाज्मा निमोनिया और इन्फ्लूएंजा फ्लू के मामलों में वृद्धि के मद्देनजर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने शनिवार को कहा, सरकार स्थिति पर नजर रख रही है और बचाव के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे है।
वैश्विक चिंता का कारण बने इस प्रकोप के बारे में पूछे जाने पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, आईसीएमआर और स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक चीन में निमोनिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारत को इस तरह के जोखिमों से कैसे बचाया जा सकता है, इसपर गंभीरता से ध्यान दे रहे हैं।
Wednesday, November 15, 2023
भारत की शानदार जीत; विराट ने लगाया शतकों का अर्धशतक, शमी ने रचा इतिहास।
रोहिणी राजपूत
ICC वनडे विश्व कप में विजय रथ पर सवार भारतीय टीम सेमीफाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड को 70 रनों से हराकर फाइनल्स में अपनी जगह पक्की की। दोनों टीमें चार साल बाद एक बार फिर से सेमीफाइनल में आमने-सामने थीं। पिछली बार 2019 में कीवी टीम ने करोड़ों भारतीयों का सपना तोड़ दिया था और फाइनल में जगह बनाई थी। इस बार भारत ने न्यूजीलैंड को हराकर पिछली हार का बदला लिया। टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड को 398 रनों का लक्ष्य दिया, इसके जवाब में न्यूजीलैंड ने सिर्फ 327 रन बनाए।
विराट कोहली ने शतकों का अर्द्धशतक लगाकर इतिहास रच दिया। उन्होंने वनडे करियर का 50वां शतक लगाया। इस मामले में विराट ने महान सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ दिया।सचिन ने 452 वनडे पारियों में 49 शतक लगाए थे। वहीं, कोहली ने 279वीं पारी में 50 शतक लगा दिए हैं। कोहली ने 113 गेंद में 117 रन की पारी खेली। अपनी पारी में उन्होंने नौ चौके और दो छक्के लगाए। वहीं दूसरी ओर श्रेयस अय्यर ने 70 गेंद पर 105 रन बनाए। कोहली और अय्यर, दोनों ने 128 गेंद पर 163 रन जोड़े. इससे पहले कप्तान रोहित शर्मा ने 29 गेंद पर 47 रन की तूफानी पारी खेल कर भारत को तेज शुरुआत दिलाई, जबकि बीच में रिटायर्ड हर्ट होने वाले शुभमन गिल ने अंतिम ओवर में वापसी की और कुल 66 गेंद पर नाबाद 80 रन की पारी खेली। केएल राहुल 20 गेंद पर 39 रन बना कर नाबाद रहे। पिछले मैच में शतक जड़ने वाले अय्यर ने अपनी उसी लय को बरकरार रखा और अपने घरेलू मैदान वानखेड़े में छक्कों की बौछार करके दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। उन्होंने साउदी पर छक्का लगाने के बाद अगली गेंद पर एक रन लेकर 67 गेंद पर अपना शतक पूरा किया। यह विश्व कप के नॉकआउट चरण में सबसे तेज शतक है। अय्यर इसके बाद बोल्ट की गेंद पर लॉन्ग ऑफ पर कैच देकर पवेलियन लौटे, जिससे भारत 400 रन के पार नहीं पहुंच पाया। अय्यर ने अपनी पारी में चार चौके और आठ छक्के लगाए।
*शमी का जलवा*
भारतीय गेंदबाजी की आज पहली ऐसी परीक्षा हुई है जहां बल्लेबाज उनके ऊपर हावी दिखे। मोहम्मद शमी को छोड़कर सभी की पिटाई हुई। मिडिल ओवर्स में स्पिनर्स भी विकेट लेने में नाकामयाब रहे। मानो शमी किसी और गेंद से गेंदबाजी कर रहे थे और बाकी गेंदबाज अलग। शमी ने 9.5 ओवर में 57 रन देकर 7 विकेट लिए। वह आशीष नेहरा के बाद विश्व कप में 6 विकेट लेने वाले दूसरे भारतीय बने। शमी के अलावा कुलदीप यादव को एक ही विकेट मिला, लेकिन उन्होंने 10 ओवर में सिर्फ 56 रन देकर कीवी बल्लेबाजों की रफ्तार को रोक कर रखा। इसके अलावा जसप्रीत बुमराह ने भी स्लॉग ओवर्स में रन रोके और ग्लेन फिलिप्स के रूप में एक विकेट भी लिया।
##ICC नॉकआउट में पहली बार न्यूजीलैंड से जीता भारत
भारतीय टीम पहली बार आईसीसी नॉकआउट में न्यूजीलैंड के खिलाफ जीत दर्ज कर पाई है। इससे पहले तीन मौकों पर भारत को हार ही मिली थी। 2000 चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल, 2019 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल और 2021 वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में न्यूजीलैंड ने भारत को हराया था। अब भारतीय टीम ने इन तीनों हार का बदला लिया और न्यूजीलैंड को हराकर चौथी बार वर्ल्ड कप फाइनल में जगह बनाई है। इससे पहले भारत 1983, 2003 और 2011 में फाइनल खेला है। जिसमें से 1983 और 2011 में टीम दो बार विश्व विजेता भी बनी थी। अब 19 नवंबर को भारत का फाइनल में साउथ अफ्रीका या ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाले सेमीफाइनल की विजेता टीम से मैच होगा। यह मैच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा।
Saturday, November 11, 2023
रामनगरी अयोध्या दीपोत्सव के लिए सज कर तैयार, 24 लाख दियों से बनेगा वर्ल्ड रिकॉर्ड
रोहिणी राजपूत
रामलला के अस्थाई मंदिर का आखिरी दीपोत्सव बेहद खास होने वाला है। बता दें कि सूत्रों के मुताबिक 22 जनवरी, 2024 को रामलला अपने भव्य मंदिर के गर्भ गृह में विराजमान हो जाएंगे। रामनगरी अयोध्या में तीन दिवसीय दीपोत्सव कार्यक्रम गुरुवार से शुभारंभ हो चुका है। रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले इस बार के दीपोत्सव को बेहद भव्य तरीके से मनाने की तैयारी जोरों–शोरों से की गई है। प्रभु राम की नगरी को दुल्हन की तरह सजाया गया है।
दीपोत्सव को ऐतिहासिक बनाने के लिए राम की पैड़ी के 51 घाटों पर 24 लाख दिये जलाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया जाएगा। इसी दौरान देश-विदेश के कलाकार अपनी प्रस्तुति से लोक संस्कृति का प्रदर्शन करते नजर आएंगे। अहम बात है की लंका विजय के बाद अयोध्या लौटने पर जिस प्रकार त्रेतायुग में श्रीराम के आगमन पर भव्य स्वागत हुआ था, उसी प्रकार इस वर्ष भी ऐसी तैयारियां की गई हैं। 11 नवंबर (शनिवार) यानी कि आज शाम भगवान राम पुष्पक विमान रूपी हेलीकॉप्टर से वनवासी के वेशभूषा में माता सीता व लक्ष्मण के साथ राम कथा पार्क में उतरेंगे। यहां गुरु वशिष्ठ के रूप में सीएम योगी आदित्यनाथ व राज्यपाल आनंदीबेन पटेल उनकी अगवानी करेंगे। इसी बीच हेलीकॉप्टर से पूरी अयोध्या में पुष्प वर्षा होगी जो,अपने आप में अद्भुत दृश्य होगा।
देश के विभिन्न राज्यों की लोक संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। गुजरात का गरबा, केरल का कथकली, राजस्थान का कालबेलिया नृत्य आकर्षण का केंद्र होगा। दीपोत्सव में भारत के कई प्रांतों की भाषा व संस्कृति का भी अद्भुत संगम दिखेगा। एक तरफ जहां अयोध्या की 12 रामलीलाओं के कलाकारों को मंच मिलेगा, तो वहीं आजमगढ़ के मुन्नालाल व उनकी टीम धोबिया नृत्य, बुंदेलखंड का राई–नृत्य व राम–हनुमान सेना की झांकी भी आकर्षण बढ़ाकर चार चांद लगाएगी। अपने नृत्यों एवं झांकियां से कलाकार भगवान राम के श्री चरणों में अपनी हाजिरी लगाएंगे।
Wednesday, November 1, 2023
मां की महिमा: देवभूमि की मां झूला देवी, जहां शेर करता हैं रखवाली
संवाददाता - रोहिणी राजपूत
उत्तराखंड अपने आप में कई रहस्यों को समेटे हुए है। इसलिए इस धरती को देवताओं की भूमि, "देवभूमि" भी कहा जाता है। आज हम आपकों देवभूमि के बारे में एक ऐसे मंदिर से अवगत कराते हैं, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां मंदिर की रखवाली मां की सवारी, शेर करता है। सुनने में आश्चर्यजनक हैं परंतु यह सत्य घटना पर आधारित हैं।
अल्मोड़ा जिले के रानीखेत में झूला देवी मंदिर स्थित है। यह कहा जाता है कि मंदिर लगभग 700 वर्ष पुराना है । चैबटिया क्षेत्र जंगली जानवर से भरा घना जंगल था । “तेंदुओं और बाघ” आसपास के लोगों पर हमला करते थे और उनके पालतू पशुओं को ले जाते थे । लोगों को “तेंदुओं और बाघ” से डर लगा रहता था और खतरनाक जंगली जानवर से सुरक्षा के लिए आसपास के लोग ‘माता दुर्गा’ से प्रार्थना करते थे । ऐसा कहा जाता है कि ‘देवी’ ने एक दिन चरवाहा को सपने में दर्शन दिए और चरवाहा से कहा कि वह एक विशेष स्थान खोदे, क्यूंकि देवी उस स्थान पर अपने लिए एक मंदिर बनवाना चाहती थी। जैसे ही चरवाहा ने गड्ढा खोदा तो चरवाहा को उस गड्ढे में देवी की मूर्ति मिली। इसके बाद ग्रामीणों ने उस जगह पर एक मंदिर का निर्माण किया और देवी की मूर्ति को स्थापित किया और इस तरह ग्रामीणों को जंगल जानवरों द्वारा उत्पीड़न से मुक्त कर दिया गया। मंदिर की स्थापना के कारण चरवाहा अपने पशुओ को घास चरहने के लिए निश्चित होकर वहां छोड़ जाते थे। मंदिर परिसर के चारों ओर लटकी हुई अनगिनत घंटियां ‘मां झुला देवी’ की दिव्य व दुःख खत्म करने वाली शक्तियों को दर्शाती है । मंदिर में विराजित झूला देवी के बारे में यह माना जाता है कि झूला देवी अपने भक्तों की इच्छाओं को पूरा करती हैं और इच्छाओं को पूरा करने के बाद भक्त यहाँ तांबे की घंटी भेट स्वरुप चढाने आते हैं।
झूला देवी मंदिर को "माँ झुला देवी मंदिर" और "घंटियों वाला मंदिर" के रूप में भी जाना जाता है रानीखेत का प्रमुख आकर्षण है यह ‘घंटियों वाला मंदिर’। मां दुर्गा के इस छोटे-से शांत मंदिर में श्रद्घालु मन्नत पूरी होने पर छोटी-बड़ी घंटियां चढ़ाते हैं। यहां बंधी हजारों घंटियां देख कर कोई भी अभिभूत हो सकता है।
रानीखेत में स्थित मां दुर्गा के इस मंदिर की रखवाली बाघ करते हैं, लेकिन वह स्थानीय लोगों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। नवरात्र पर मां के इस मंदिर में भक्तों का सिलसिला लग जाता है।
मंदिर की स्थापना के बाद पिलखोली गांव के लोग अक्सर अपने जानवरों को चराने के लिए इस स्थान पर आते थे. बताया जाता है कि सावन के महीने में सभी बच्चे मां के प्रांगण में झूला डालकर झूला झूलते थे। मां के झूला झूलने के बारे में एक और कथा प्रचलित है। माना जाता है कि एक बार श्रावण मास में माता ने किसी व्यक्ति को स्वप्न में दर्शन देकर झूला झूलने की इच्छा जताई। ग्रामीणों ने मां के लिए एक झूला तैयार कर उसमें प्रतिमा स्थापित कर दी।तब से लेकर आज तक, देवी मां झूले पर विराजमान हैं और तब से ही मां को झूला देवी के नाम से जाना जाता है। उसी दिन से यहां देवी मां “झूला देवी” के नाम से पूजी जाने लगी।
Monday, October 23, 2023
बुराई पर अच्छाई की जीत और असत्य पर सत्य की जीत का उत्सव विजय दशमी: दशहरा
संवाददाता - रोहिणी राजपूत
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाने वाला विजयदशमी का त्योहार हर साल बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जाता है। वहीं इसके अलावा यह भी माना जाता है कि विजयादशमी के दिन मां दुर्गा ने 9 दिनों के युद्ध के बाद महिषासुर का वध किया और इस तरह अच्छाई की जीत हुई।
आइए विस्तार से जानते हैं दशहरा मानने के मुख्य कारण
1. माता ने किया था महिषासुर का वध : इस दिन माता कात्यायनी दुर्गा ने देवताओं के अनुरोध पर महिषासुर का वध किया था तब इसी दिन विजय उत्सव मनाया गया था। इसी के कारण इसे विजयादशमी कहा जाने लगा। विजया माता का एक नाम है। यह पर्व प्रभु श्रीराम के काल में भी मनाया जाता था और श्रीकृष्ण के काल में भी। माता द्वारा महिषासुर का वध करने के बाद से ही असत्य पर सत्य की जीत का पर्व विजयादशमी के रूप में मनाया जानें लगा।
2. श्रीराम ने किया था रावण वध : वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान राम ने ऋष्यमूक पर्वत पर आश्विन प्रतिपदा से नवमी तक आदिशक्ति की उपासना की थी। इसके बाद भगवान श्रीराम इसी दिन किष्किंधा से लंका के लिए रवाना हुए थे। यह भी कहा जाता है कि रावण वध के कारण दशहरा मनाया जाता है। दशमी को श्रीराम ने रावण का वध किया था। श्रीराम ने रावण का वध करने के पूर्व नीलकंठ को देखा था। नीलकंठ को शिवजी का रूप माना जाता है। अत: दशहरे के दिन इसे देखना बहुत ही शुभ होता है। रावण का वध करने के बाद से ही यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत की खुशी में मनाया जानें लगा।
विजयादशमी कृतज्ञता का दिन है। इस दिन हमने जीवन में जो भी कुछ प्राप्त किया है, उसके लिए हम कृतज्ञ होते हैं।
हिंदू परंपरा में नवरात्रि के दौरान और दशहरा से एक दिन पहले शस्त्रों की पूजा की मान्यता है। अभी भी काफ़ी लोग इसे से परिचित नहीं हैं।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि दशहरा के दिन शस्त्र पूजन करने की परंपरा सदियों पुरानी है। आश्विन शुक्ल पक्ष दशमी को शस्त्र का पूजन किया जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के पूजन के बाद दशहरे का त्योहार मनाया जाता है। विजयदशमी पर मां दुर्गा का पूजन किया जाता है। मां दुर्गा शक्ति का प्रतीक हैं। भारत की रियासतों में शस्त्र पूजन धूम-धाम से मनाया जाता था। अब रियासतें तो नही रहीं लेकिन परंपराएं शाश्वत हैं, यही कारण है कि इस दिन आत्मरक्षार्थ रखे जाने वाले शस्त्रों की भी पूजा की जाती है। हथियारों की साफ-सफाई की जाती है और उनका पूजन होता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन किए जाने वाले कामों का शुभ फल अवश्य प्राप्त होता है। यह भी कहा जाता है कि शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए इस दिन शस्त्र पूजा करनी चाहिए।
शस्त्र पूजन को दुसरा नाम "आयुध पूजा" भी हैं।
शस्त्र पूजा क्या है ?
यह वह दिन है जिसमें हम शस्त्रों को पूजते हैं और उनके प्रति कृतज्ञ होते हैं. क्योंकि इनका हमारे जीवन में बहुत महत्व है। इस दिन क्षत्रिय अपने शस्त्रों की, शिल्पकार अपने उपकरणों की पूजा करते हैं, कला से जुड़े लोग अपने यंत्रों की पूजा करते हैं. दक्षिण भारत में इस दिन सरस्वती पूजा होती है।
शस्त्र पूजा का महत्व:
शस्त्र पूजा का संबंध मां दुर्गा से हैं। इसे नवरात्रि में मनाया जाता है। मान्यता है कि दशहरा से पहले आयुध पूजा में शस्त्र, यंत्र और उपकरणों का पूजन करने से हर कार्य में सफलता मिलता है
प्राचीन काल में क्षत्रिय युद्ध पर जाने के लिए दशहरा का दिन चुनते थे, ताकि विजय का वरदान मिले। इसके अलावा पौराणिक काल में ब्राह्मण भी दशहरा के ही दिन विद्या ग्रहण करने के लिए अपने घर से निकलते थे और व्यापारी वर्ग भी दशहरा के दिन ही अपने व्यापार की शुरुआत करना अच्छा मानते थे। यही वजह है कि दशहरे से पहले आयुध पूजा बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है.
आयुध पूजा का पर्व कैसे मनाते हैं
इस दिन सभी यंत्रों की अच्छी तरह से सफाई कर उनकी पूजा की जाती है। कुछ भक्त देवी का आशीर्वाद लेने के लिए अपनी जीत की उपलब्धियों को यानि अपने उपकरण देवी के सामने रखते हैं। शस्त्र पूजा के दिन छोटी-छोटी चीज़ें जैसे पिन, चाकू, कैंची, वाद्य यंत्र, हथकल से लेकर बड़ी मशीनें, गाड़ियां, बस आदि सभी को पूजा जाता है।
शस्त्र पूजा का इतिहास:
महिषासुर को परास्त करने के लिए समस्त देवताओं ने देवी दुर्गा को अपने-अपने शस्त्र प्रदान किए थे। महिषासुर जैसे शक्तिशाली राक्षस को को हराने के लिए देवों को अपनी समूची शक्तियां एक साथ लानी पड़ी। अपनी दस भुजाओं के साथ मां दुर्गा प्रकट हुईं, उनकी हर भुजा में एक हथियार था। महिषासुर और देवी के बीच नौ दिन तक लगातार युद्ध चलता रहा। दसवें दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया। सभी शस्त्रों के प्रयोग का उद्देश्य पूरा हो जाने के बाद उनका सम्मान करने का समय था, उन्हें देवताओं को वापस लौटना भी था। इसलिए सभी हथियारों की साफ-सफाई के बाद पूजा की गई, फिर उन्हें लौटाया गया।इसी की याद में शस्त्र पूजा (आयुध पूजा)की जाती है।
Saturday, October 14, 2023
टीम इंडिया की 7 विकेट से शानदार जीत, विश्व कप में आठवीं बार पाकिस्तान को चटाई धूल
संवाददाता - रोहिणी राजपूत
नीले समंदर में डूबे नरेंद्र मोदी स्टेडियम में रोहित शर्मा का बल्ला कुछ ऐसा चला कि पाकिस्तानी आक्रमण की धार कुंद हो गई और इस चर्चित मुकाबले में भारत ने शनिवार को सात विकेट से एकतरफा जीत दर्ज करके चिर प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ विश्व कप में जीत का रिकॉर्ड 8.0 कर लिया ।
इस मैच में भारत ने टॉस जीतकर गेंदबाजी का फैसला लिया। पाकिस्तान की टीम ने 42.5 ओवर में 191 रन बनाकर खेल समाप्त किया। जवाब में, भारत ने 30.3 ओवर में तीन विकेट गवाकर 192 रन बनाए और मैच अपने नाम किया। यह भारत की आठवीं जीत है जो विश्व कप इतिहास में पाकिस्तान के खिलाफ हुई है। इस टूर्नामेंट में अब तक भारत ने उनके खिलाफ नहीं हारा है।
डेंगू से उभरकर लौटे शुभमन गिल (16) और विराट कोहली (16) शुरुवाती दौर मे आउट हो गए थे । इससे पहले भारत के लिये नयी गेंद संभालने वाले सिराज और बुमराह ने अपनी लैंग्थ में बदलाव करके सीम का पूरा फायदा उठाते हुए पाकिस्तान को बीच में ही पछाड़ दिया । कुलदीप यादव ने सऊद शकील (छह) और इफ्तिखार अहमद (चार) को लगातार आउट करके पाकिस्तान की परेशानियां और बढा दी।
*रोहित शर्मा ने की छक्कों की बारिश*
रोहित ने लगातार दूसरे मैच में शतक नहीं लगाया, जब वे अफगानिस्तान के खिलाफ 131 रनों की पारी खेले। मैच में उन्हे शतक लगाने का मौका था, लेकिन वह ऐसा नहीं कर सके। रोहित ने 63 गेंदों पर 86 रन बनाए और पवेलियन लौटे। रोहित के बल्ले से छह चौके और छह छक्के भी लगे। इसी दौरान, उनकी स्ट्राइक रेट 136.51 रही। रोहित ने अपनी पारी के दौरान वनडे में 300 छक्के भी पूरे किए। उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी और वेस्टइंडीज के पूर्व ओपनर क्रिस गेल के बाद ऐसा करने वाले तीसरे बल्लेबाज बने।
*श्रेयस ने लगाया विजयी चौका*
रोहित शर्मा के आउट होने के बाद श्रेयस अय्यर ने केएल राहुल के साथ मिलकर मैच को समाप्त किया। दोनों बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए नाबाद 36 रन की साझेदारी की। अय्यर ने चौका लगाकर अपना अर्धशतक पूरा किया और मैच को समाप्त किया। वह 62 गेंद पर 53 रन बनाकर नाबाद रहे। अय्यर ने तीन चौके और दो छक्के लगाए। केएल राहुल 29 गेंद पर 19 रन बनाकर नाबाद रहे। उनके बल्ले से दो चौके निकले।
टीम इंडिया के लिए पांच गेंदबाजों ने दो-दो विकेट लिए। जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज, हार्दिक पांड्या, कुलदीप यादव और रवींद्र जडेजा ने दो-दो विकेट लिए। गेंदबाजी करने वालों में सिर्फ शार्दुल ठाकुर ही ऐसे रहे जिन्हें एक भी सफलता नहीं मिली। बुमराह को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
नवरात्रि की तैयारी में जुटे शहर को भारत की जीत ने एक दिन पहले ही उत्सवमय कर दिया और मैदान पर भारी तादाद में जुटे दर्शकों के उल्लास ने इसकी बानगी दी कि जीत का जश्न स्टेडियम में थमने वाला नहीं है । वहीं टीवी के आगे नजरें गड़ाये बैठे देश के कोने कोने में क्रिकेटप्रेमियों के लिये त्योहार की शुरूआत आज ही से हो गई ।
Wednesday, October 11, 2023
नालंदा विश्वविद्यालय: एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर
संवाददाता - रोहिणी राजपूत
प्राचीन काल में भारतवर्ष शिक्षा के क्षेत्र में सबसे आगे हुआ करता था। नालंदा विश्वविद्यालय भारतीय संस्कृति और शिक्षा के महासागर में एक महत्वपूर्ण द्वीप है। यह विश्वविद्यालय भारतीय सांस्कृतिक और शैक्षणिक इतिहास का महत्वपूर्ण केंद्र था और अपनी विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध था। यहाँ की शिक्षा-पद्धति पूरे विश्व में आश्चर्य का विषय थी। इसी वजह से नालंदा विश्वविद्यालय मे शिक्षा प्राप्त करने के लिए लोग तिब्बत, तुर्की, जापान, चीन, इंडोनेशिया, तिब्बत, फारस तथा कोरिया जैसे देशों से भारत आते थे।
यहाँ प्रवेश लेने के लिए तीन स्तरों वाली बहुत ही कठिन प्रवेश परीक्षा हुआ करती थी। अत्यंत प्रतिभाशाली छात्र ही इन परीक्षाओं में सफल होकर यहाँ प्रवेश पाते थे। प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग ने यहाँ आकर शिक्षा प्राप्त की और यहाँ के जीवन के बारे में अपनी किताब में लिखा।
प्राचीन भारत में बहुत से विश्वविद्यालय हुआ करते थे जिनमे से एक महान विश्वविद्यालय नालन्दा भी था जो कि अपनी समृद्ध विरासत और ऐतिहासिक महत्व के लिए पूरे विश्व में जाना जाता था। नालन्दा विश्वविद्यालय बिहार राज्य जिसे पहले मगध के नाम से जाना जाता था की राजधानी पटना के 95 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व बिहार शरीफ के पास स्थित हैं। 1193 में आक्रमणकारियों द्वारा नष्ट कर दिए जाने के बाद आज बस यहाँ पर इसके खंडहर बचे है जिसे यूनेस्को के द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित कर दिया गया है।
नालन्दा विश्वविद्यालय दुनिया के सबसे पुराने और बेहतरीन आवासीय विश्वविद्यालयों में से एक था। उस समय यहाँ पर करीब 10,000 छात्र और 2000 शिक्षक रहते थे। नालंदा विश्वविद्यालय में तीन लाख किताबों से भरा एक विशाल पुस्तकालय, तीन सौ से भी ज्यादा कमरें और सात विशाल कक्ष थे। इसका भवन बहुत ही सुंदर और विशाल था जिसकी वास्तुकला भी अत्याधिक सुंदर थी।
प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय में एक मुख्य प्रवेश द्वार था बाकी का सारा परिसर चारदीवारी से घिरा हुआ था। परिसर में अनेक स्तूप, मठ और मंदिर थे इन मंदिर में भगवान बुद्ध की मूर्तियाँ विराजमान थीं। आज इस सुंदर भवन का बस खंडहर ही बाकी है पर इससे भी इस भवन की सुंदरता का अंदाज लग जाता है।
यहाँ के विशाल पुस्तकालय में विदेशी आक्रान्ताओं के द्वारा आग लगा दी गई थी तो यह किताबें 6 महीने तक जलती रही थीं।
जो नालंदा विश्वविद्यालय कभी बहुत ही विशाल क्षेत्र में फैला था, वह अब सिमट कर केवल लगभग 12 हेक्टेयर का खंडहर रह गया है। नालंदा में सभी तरह के विषय पढ़ाए जाते थे जिन्हे पढ़ने के लिए कोरिया, जापान, चीन, तिब्बत, इंडोनेशिया, फारस और तुर्की के विद्यार्थीऔर विद्वान दोनों ही आते थे।
भारतीय गणित के जनक माने जाने वाले आर्यभट्ट के बारे में अनुमान लगाया जाता है कि वे छठी शताब्दी की शुरुआत में नालंदा विश्वविद्यालय के प्रमुख थे। कोलकाता स्थित गणित की प्रोफेसर अनुराधा मित्रा ने बताया, "आर्यभट्ट पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने शून्य को एक अंक के रूप में मान्यता दी। उनकी आवधारणा से बहुत बड़े बदलाव देखने को मिले। चाणक्य ने गणितीय गणनाओं को सरल बनाया और बीजगणित एवं कैलकुलस जैसे अधिक जटिल गणित को विकसित करने में मदद की, शून्य के बिना तो हमारे पास कंप्यूटर भी नहीं होते।"
प्रोफेसर मित्रा आर्यभट्ट के योगदान को रेखांकित करते हुए कहती हैं, "उन्होंने वर्गों और घनों की श्रेणी संबंधित अहम सिद्धांत दिए। ज्यामिति और त्रिकोणमिती का बखूबी इस्तेमाल किया। खगोल विज्ञान में भी उनका योगदान अहम था, वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने कहा था कि चंद्रमा की अपनी रोशनी नहीं है।
नालन्दा पुस्तकालय के अवशेष
रत्नोदधि नौ मंजिला ऊंची थी और इसमे प्रज्ञापारमिता सूत्र और गुह्यसमाज सहित सबसे पवित्र पांडुलिपियों को रखा गया था। नालंदा में मौजूद किताबों की संख्या सटीक रूप से तो नहीं पता है फिर भी अनुमान के हिसाब से इनकी संख्या लाखों में मानी जाती है। इस पुस्तकालय ने न केवल धार्मिक पांडुलिपियां बल्कि व्याकरण, तर्क, साहित्य, ज्योतिष, खगोल विज्ञान और चिकित्सा जैसे विषयों पर अनेकों ग्रंथ भी मौजूद थे। नालंदा पुस्तकालय किताबों को सही तरीके से रखने के लिए अवश्य ही संस्कृत भाषाविद्, पाणिनि द्वारा बनाई गई वर्गीकरण योजना का प्रयोग करता था।
*आक्रमणकारियों द्वारा विध्वंश:*
इस विश्वविद्यालय पर तीन-तीन बार आक्रमण किए गए जिसके बाद दो बार इसे उस समय राज्य करने वाले राजाओं ने फिर से बनवा दिया पर जब तीसरी बार हमला हुआ जो कि अब तक का सबसे बड़ा और विनाशकारी हमला था।
*नालंदा विश्वविद्यालय का महाविनाश*
इस हमले में यहाँ के पुस्तकालय की काफी सारी किताबें और दुर्लभ ग्रंथ जल गए थे। माना जाता है की इस विश्वविद्यालय के विनाश से ही भारत में बौद्ध धर्म का भी पतन होना शुरू हो गया।
पहला हमला:
इस विश्वविद्यालय पर पहला हमला सम्राट स्कंदगुप्त के समय में 455-467 ईस्वी में हुआ था। यह हमला मिहिरकुल के तहत ह्यून की वजह से हुआ था। इस हमले में विश्वविद्यालय की इमारत के सात-साथ पुस्तकालय को भी काफी नुकसान पहुँचा था। बाद में स्कंदगुप्त के उत्तराधिकारीयों के द्वारा पुस्तकालय की मरम्मत करवा दी गई और एक नई बड़ी इमारत बनवा दी गई।
दूसरा हमला:
इस विश्वविद्यालय पर दूसरा हमला 7वीं शताब्दी की शुरुआत में गौदास ने किया था। उस समय बौद्ध राजा हर्षवर्धन का शासन हुआ करता था। 606-648 ईस्वी में उन्होंने इस विश्वविद्यालय की मरम्मत करवाई थी।
तीसरा और सबसे विनाशकारी हमला:
इस विनाशकारी हमले के समय यहाँ पल राजवंश का राज्य हुआ करता था। मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी, जो की एक तुर्क सेनापति था, उस समय अवध में तैनात था। इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी और उसकी सेना ने लगभग 1193 सी ई में, प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय को नष्ट कर दिया था।
उसने पुस्तकालय की किताबों को आग लगा दी। जो कुछ भी वहाँ था उसे लूट लिया विश्वविद्यालय में रह रहे हजारों भिक्षुओं और विद्वानों को इसलिए जला कर मार दिया क्योंकि वह इस्लाम धर्म का प्रचार प्रसार करना चाहता था और उसे बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार से चिढ़ थी। इन बातों का जिक्र फारसी इतिहासकार ‘मिनहाजुद्दीन सिराज’ द्वारा लिखी गई किताब ‘तबाकत-ए-नासिरी’ में मिलता है ।
*#खिलजी ने नष्ट की नालंदा विश्वविद्यालय*
खिलजी के द्वारा नालंदा के पुस्तकालय को जलाने के पीछे एक कहानी प्रसिद्ध है। कहा जाता है की खिलजी एक बार बुरी तरह से बीमार पड़ गया। सबने उसे नालंदा विश्वविद्यालय के वैद्य आचार्य राहुल श्रीभद्र से इलाज करवाने के लिए कहा पर खिलजी को ना तो आयुर्वेद पर ना वैद्यों पर जरा भी भरोसा था। उसने वैद्य जी के सामने कोई भी दवा ना खाने की शर्त रख दी।
वैद्य जी तैयार हो गए उन्होंने कहा कि आप कुरान के इतने पन्ने पढ़ लीजिएगा आप ठीक हो जाएंगे और ऐसा ही हुआ।ठीक होने के बाद उसने सोचा की इस तरह से तो भारतीय विद्वान और शिक्षक पूरी दुनिया में मशहूर हो जाएंगे। भारत से बौद्ध धर्म और आयुर्वेद के ज्ञान को मिटाने के लिए उसने नालंदा विश्वविद्यालय और इसके पुस्तकालय में आग लगा दी और हजारों धार्मिक विद्वानों और बौद्ध भिक्षुओं को भी मार डाला।
Disclamer : यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यता, सूचनाओं और हमारे व्यक्तिगत स्तर जाच पर आधारित है।
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सुशांत सिंह राजपूत केस फिर चर्चा में, दिशा सालियान मामले में CBI ने दर्ज की FIR; जानिए अब तक क्या हुआ
संवाददाता - रोहिणी राजपूत नई दिल्ली: अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को छह साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन यह मामला एक बार फिर चर्चा...
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संवाददाता - रोहिणी राजपूत नोएडा | 19 दिसंबर 2025 गुलशन कुमार फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ( GKFTII ) और T-Series StageWorks Acad...
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जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग में आम आदमी मैदान में ! संवाददाता - अभिनव राजपूत आज दिनांक 11 जुलाई 2023 को विश्व जनसंख्या दिवस के उपलक्...
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नोएडा, 14 नवंबर 2024: दिल्ली मेट्रोपॉलिटन एजुकेशन (डीएमई) मीडिया स्कूल ने अपने 9वें वार्षिक मीडिया सम्मेलन और उत्सव, 'वृतिका 2024',...




















































